
मनेन्द्रगढ़ में यातायात अव्यवस्था और बेरोजगारी पर उठे सवाल
मनेन्द्रगढ़। जिला मुख्यालय होने के बावजूद मनेन्द्रगढ़ शहर आज बुनियादी व्यवस्थाओं के अभाव से जूझ रहा है। शहर की संकरी और अव्यवस्थित सड़कें रोज़ाना यातायात जाम का कारण बन रही हैं, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
शहर के प्रमुख बाजार क्षेत्रों और चौक-चौराहों पर बेतरतीब ढंग से लगे सब्जी ठेले यातायात व्यवस्था को और अधिक बिगाड़ रहे हैं। स्थानीय पत्रकार आनंद शर्मा ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यदि जिला प्रशासन चाहे, तो ठेलों के लिए वैकल्पिक और सुव्यवस्थित स्थान चिन्हित कर व्यवस्था को सुधारा जा सकता है। मनेन्द्रगढ़ में भूमि की कमी नहीं है, समस्या केवल प्रशासनिक इच्छाशक्ति की है।
इसी बीच बेरोजगारी का सवाल भी लगातार गहराता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि मनेन्द्रगढ़ विधायक श्याम बिहारी जायसवाल वास्तव में युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें रोजगार सृजन की दिशा में ठोस योजना लानी होगी। शहर के बड़े पार्कों या सार्वजनिक परिसरों में योजनाबद्ध तरीके से दुकानों का निर्माण कर कई युवाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है।
गौरतलब है कि मनेन्द्रगढ़ में मेडिकल कॉलेज के निर्माण की योजना और सड़कों के लिए करोड़ों रुपये के बजट की स्वीकृति जैसे बड़े विकास कार्य प्रस्तावित हैं। लेकिन इन योजनाओं के बीच बेरोजगार युवाओं के लिए किसी दीर्घकालिक और स्थायी रोजगार योजना का अभाव साफ नजर आता है।
आज मनेन्द्रगढ़ का आम नागरिक यही सवाल पूछ रहा है—
क्या विकास सिर्फ इमारतों और सड़कों तक सीमित रहेगा, या युवाओं के भविष्य को भी संवारने की कोई ठोस पहल होगी?






