
ज्ञान शंकर तिवारी
पाली/कोरबा।
नागवंशी कल्याण युवा समिति छत्तीसगढ़ के युवा लगातार सेवा के क्षेत्र में नई मिसालें कायम कर रहे हैं। समिति से जुड़े युवाओं का उद्देश्य है— “जरूरतमंद तक रक्त पहुँचाना ही सबसे बड़ी मानव सेवा है।”
इसी कड़ी में जशपुर के शंकर नागवंशी ने थैलेसीमिया से जूझ रही कु. ललिता पैंकरा को रक्तदान किया, वहीं अंबिकापुर में सागर सुकरा ने किडनी की बीमारी से पीड़ित श्री सुखनाथ नागवंशी को रक्तदान कर जीवनदान दिया। युवाओं का कहना है कि “जरूरतमंद की मदद करना ही असली ईश्वर सेवा है।”
कभी समाज में हीन दृष्टि से देखे जाने वाले नागवंशी समाज के युवाओं ने आज अपने सेवा कार्यों से पहचान बदल दी है। छोटे से संगठन के रूप में शुरू हुई यह पहल आज “नागवंशी कल्याण युवा समिति” के रूप में समाज को नई दिशा दे रही है।
समिति के कार्यों से न केवल नागवंशी समाज बल्कि अन्य समाज भी प्रेरणा ले रहे हैं। यही वजह है कि आज समाज के प्रति लोगों की सोच में सकारात्मक परिवर्तन दिखने लगा है।
समिति के सदस्य कहते हैं—
“हमारा प्रयास है कि यह सेवा एक नन्हा पौधा बनकर शुरू हुई थी, अब यह वटवृक्ष बने और हर जरूरतमंद को छाया, प्रेरणा और सहारा मिले।”
युवा समिति ने आह्वान किया है कि हर समाज को संगठित होकर सेवा और राष्ट्रहित के कार्यों में आगे आना चाहिए, ताकि समाज और देश दोनों और अधिक मजबूत बन सकें।






