
महासमुंद: बसना ब्लॉक का ग्राम मिलाराबाद आज पूरे प्रदेश के किसानों के लिए जीवंत मिसाल बन गया है। यहां का प्रधान परिवार 42 एकड़ जमीन पर पूरी तरह जैविक खेती करता है और अपने मेहनत, लगन और प्यार से प्रकृति और परंपरा का सच्चा सम्मान कर रहा है।
परिवार के मुखिया अंतर्यामी प्रधान कहते हैं – “हम गाय को नहीं पालते, बल्कि गाय हमें पालती है।” उनके शब्दों में गाँव की मिट्टी, गाय की सेवा और खेती के प्रति गहरी आत्मीयता झलकती है। 60 देसी गायों से बने बीजामृत, जीवामृत और ब्रह्मास्त्र ही उनकी फसल की ताकत हैं।

खेती में केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं भी बराबरी से जिम्मेदारी निभा रही हैं। खेत की निराई-गुड़ाई, खाद और औषधियों की तैयारी में उनका हाथ परिवार की सफलता की कहानी को और भी जीवंत बनाता है।
धान की कलानमक नरेंद्र 01, शाही नमक, गंगाबालू और सुपरफाइन जैसी उन्नत किस्में, गेहूं, मक्का, गन्ना, अरहर, मूंगफली, आम और नारियल — ये सारी फसलें परिवार की मेहनत और आत्मविश्वास की कहानी कहती हैं। उनके चावल को ‘श्रीमोती’ ब्रांड के नाम से देश भर में बेचा जाता है।
अंतर्यामी प्रधान और उनके भाई विश्वामित्र व धनपति प्रधान भी हर एक खेत में मेहनत का संकल्प लेकर जुटे हैं। उनके प्रयास यह साबित कर रहे हैं कि जैविक खेती सिर्फ मुनाफ़ा ही नहीं देती, बल्कि स्वास्थ्य, पर्यावरण और गांव की खुशहाली का रास्ता भी खोलती है।
मिलाराबाद का यह परिवार हमें याद दिलाता है कि जब इंसान और प्रकृति साथ मिलकर काम करते हैं, तो केवल खेत ही नहीं, दिल भी हरा-भरा हो जाता है।






