
✍️ भागीरथी यादव
कोरबा। जिले के कटघोरा क्षेत्र से एक बेहद मार्मिक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक नवविवाहित युवक ने कथित रूप से परफ्यूम पीने के बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। मृतक की पत्नी सात माह की गर्भवती है, जिसके सिर से पति का साया उठ गया।
मृतक की पहचान कटघोरा निवासी 28 वर्षीय विद्यासागर के रूप में हुई है, जो पेशे से मिस्त्री था। परिजनों के अनुसार, विद्यासागर शांत स्वभाव और सरल जीवन जीने वाला युवक था। उसकी शादी वर्ष 2025 में हुई थी और परिवार में सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन बीते कुछ दिनों से उसकी मानसिक स्थिति में अचानक बदलाव देखने को मिल रहा था।

परफ्यूम पीकर उठाया आत्मघाती कदम
सोमवार 5 जनवरी को विद्यासागर घर पहुंचा और अपने छोटे भाई से परफ्यूम मांगा। परफ्यूम लगाने के बाद वह उसे लेकर अपने कमरे में चला गया। कुछ देर बाद जब परिजन कमरे की ओर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि विद्यासागर फांसी के फंदे पर लटका हुआ था। कमरे से परफ्यूम की खाली शीशी भी बरामद हुई, जिससे आशंका जताई जा रही है कि उसने फांसी लगाने से पहले परफ्यूम पी लिया था।
घटना के बाद परिजन बदहवास हालत में उसे नीचे उतारकर कटघोरा सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
जादू-टोना को लेकर डरा हुआ था युवक: परिजन
मृतक के बड़े भाई बजरंग सिंह उइके ने बताया कि विद्यासागर पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान था। कभी वह बिल्कुल सामान्य रहता, तो कभी अचानक असहज और घबराया हुआ नजर आता। परिजनों का आरोप है कि किसी जादू-टोने के डर के कारण वह अंदर ही अंदर टूट चुका था। ग्रामीण क्षेत्रों में फैले अंधविश्वास के चलते परिवार को शक है कि इसी मानसिक दबाव ने उसे यह कदम उठाने पर मजबूर किया।
पुलिस जांच में जुटी, बयान दर्ज
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। जिला अस्पताल चौकी प्रभारी सुरेश मणि सोनवानी ने बताया कि मृतक के परिजनों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और मामले की डायरी आगे की जांच के लिए संबंधित थाने भेजी जा रही है।
विशेषज्ञ बोले- अंधविश्वास बन सकता है जानलेवा
इस मामले पर चिकित्सक डॉ. दिनेश मिश्र ने चिंता जताते हुए कहा कि समाज में फैला अंधविश्वास और जादू-टोने का डर लोगों को मानसिक रूप से कमजोर कर देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जादू-टोना कोई वास्तविक कारण नहीं होता, बल्कि यह भ्रम और मानसिक भय होता है, जो व्यक्ति को गंभीर तनाव और अवसाद की ओर ले जा सकता है।
यह घटना न सिर्फ एक परिवार की खुशियों को उजाड़ गई, बल्कि समाज के सामने यह सवाल भी छोड़ गई कि अंधविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही कितनी भयावह साबित हो सकती है।






