
✍️ भागीरथी यादव
कोंडागांव – रॉन्ग नंबर से शुरू हुई बातचीत को दोस्ती का जामा पहनाकर नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर अगवा करने और महीनों तक अलग-अलग गांवों में ले जाकर दैहिक शोषण करने वाले आरोपी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने कड़ी सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी दुलबो बघेल (27) को दोषी ठहराते हुए कुल 20 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है।
रॉन्ग नंबर से बना जाल, फिर मेला बना साजिश का मौका
मामला वर्ष 2023 का है। पीड़िता के मोबाइल पर आए एक रॉन्ग नंबर से बातचीत की शुरुआत हुई। कॉल करने वाले युवक ने अपना नाम दुलबो बघेल बताया और धीरे-धीरे बातचीत को दोस्ती में बदल लिया। लगभग दो माह बाद गांव में मेला लगने के दौरान आरोपी ने फोन कर पीड़िता को मेला से बाहर बुलाया और बहाने से उसे मोटरसाइकिल पर बैठाकर ग्राम मंगनार ले गया।
अलग-अलग गांवों में ले जाकर किया लगातार दुष्कर्म
अभियोजन के अनुसार आरोपी ने पीड़िता को पहले ग्राम मंगनार में अपने दोस्त के घर एक कमरे में 5–6 दिनों तक रखा और इस दौरान लगातार शारीरिक शोषण किया। इसके बाद वह उसे ग्राम बिंजोली ले गया, जहां 10–15 दिनों तक उसकी मर्जी के खिलाफ दुष्कर्म करता रहा।
इसके बाद ग्राम लावागांव और फिर ग्राम खोमार ले जाकर भी आरोपी ने लगभग एक-एक सप्ताह तक पीड़िता को बंधक बनाकर उसके साथ दैहिक शोषण किया।
कोर्ट ने माना पीड़िता को नाबालिग
न्यायालय में पीड़िता के जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल रजिस्टर और मार्कशीट पेश की गईं, जिन्हें स्कूल की शिक्षिका ने प्रमाणित किया। कोर्ट ने पीड़िता की जन्मतिथि 28 जनवरी 2008 स्वीकार करते हुए घटना के समय उसे नाबालिग माना।
गुमशुदगी से खुला संगीन अपराध का राज
14 मई 2024 को पीड़िता के पिता ने थाना अनंतपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उनकी बेटी मेला देखने गई थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। पुलिस ने धारा 363 भादवि के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। बाद में पीड़िता की बरामदगी और बयान के आधार पर आरोपी पर धारा 366, 376(2)(ढ) भादवि और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया।
कोर्ट का सख्त फैसला
स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई—
धारा 376(2)(ढ) भादवि व पॉक्सो एक्ट धारा 6: 20 वर्ष सश्रम कारावास + ₹1000 जुर्माना
धारा 366(क) भादवि: 10 वर्ष सश्रम कारावास + ₹1000 जुर्माना
धारा 363 भादवि: 5 वर्ष सश्रम कारावास + ₹1000 जुर्माना
जुर्माना अदा न करने पर आरोपी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
यह फैसला न सिर्फ पीड़िता को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि समाज में ऐसे अपराधियों के लिए कड़ा संदेश भी है कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों को कानून किसी भी हाल में बख्शेगा नहीं।






