
✍️ भागीरथी यादव
रानी अटारी–विजय वेस्ट कोल माइंस क्षेत्र बना चर्चा का केंद्र
कोरबा | ऊर्जाधानी कोरबा एक बार फिर रहस्यमय गतिविधियों को लेकर सुर्खियों में है। जिले के रानी अटारी और विजय वेस्ट कोल माइंस क्षेत्र के घने जंगलों के ऊपर बीते चार दिनों से लगातार हवाई सर्वेक्षण किए जाने से पूरे इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह हवाई सर्वे कोसाई पर्वत से लेकर पसान क्षेत्र तक किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में यूरेनियम, कॉपर सहित अन्य दुर्लभ खनिजों की मौजूदगी की संभावनाओं को लेकर आधुनिक तकनीक से अध्ययन किया जा रहा है। हालांकि प्रशासन या खनिज विभाग की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सर्वे बेहद गोपनीय तरीके से किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में चिंता और तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यह सर्वे कहीं प्रस्तावित रेलवे लाइन के निर्माण या नए खनन परियोजनाओं से जुड़ा न हो।
बताया जा रहा है कि पेंड्रा रोड से दीपका तक प्रस्तावित रेलवे लाइन को लेकर भी जंगल क्षेत्रों—बीजा डांड, पुटी पखना, अडसरा, सिंदूरगढ़, धवलपुर, रानी अटारी और विजय वेस्ट कोल माइंस—में गुप्त सर्वे किए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में रुगंटा कंपनी द्वारा प्रस्तावित नए खदानों के विरोध में ग्राम संगठन और ग्रामीणों द्वारा आंदोलन भी शुरू किया गया है। ऐसे में हवाई सर्वेक्षण की टाइमिंग ने संदेह को और गहरा कर दिया है।
यदि इन क्षेत्रों में दुर्लभ खनिजों की पुष्टि होती है, तो कोरबा जिले का सामरिक और आर्थिक महत्व राष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ सकता है। फिलहाल प्रशासन की चुप्पी और आसमान में उड़ते विमान ग्रामीणों के बीच बेचैनी का कारण बने हुए हैं।






