
ज्ञान शंकर तिवारी
कोरबा।
कोरबा जिले के मुड़ापार स्थित शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल सोमवार शाम उस समय खुल गई, जब निर्धारित समय के भीतर पहुंचे मरीजों को केंद्र का मुख्य द्वार बंद मिला। शाम करीब 7:00 बजे स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लटका हुआ था, जबकि डॉक्टर एवं अन्य स्टाफ पूरी तरह अनुपस्थित पाए गए।

इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीजों को बिना उपचार लौटना पड़ा। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को झेलनी पड़ी, जो देर शाम तक केंद्र खुलने का इंतजार करते रहे। कई मरीजों ने बताया कि नियमित समय में भी स्टाफ की अनुपस्थिति अब आम बात हो चुकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार समय से पहले स्वास्थ्य केंद्र बंद मिलने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
घटना से नाराज क्षेत्रवासियों ने जिला स्वास्थ्य प्रशासन से मांग की है कि लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, केंद्र की नियमित निगरानी की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि आम जनता को शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।
अब सवाल यह है कि आम जनता के लिए खोले गए आयुष्मान आरोग्य मंदिर आखिर किसके भरोसे चल रहे हैं?
यदि समय पर इलाज नहीं मिला, तो “स्वास्थ्य सुरक्षा” की मंशा केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।






