
चुनावी वादों पर सवाल, जनता और पत्रकारों को विधायक के जवाब का इंतज़ार
एमसीबी/भरतपुर–सोनहत।
भरतपुर–सोनहत विधानसभा क्षेत्र में रेत उत्खनन एक बार फिर जनचर्चा का केंद्र बन गया है। क्षेत्र की जनता और स्थानीय पत्रकारों में भारी असंतोष देखा जा रहा है। विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों को लेकर अब विधायक रेणुका सिंह से जवाब मांगा जा रहा है।
चुनाव प्रचार के समय प्रत्याशी रहीं रेणुका सिंह ने तत्कालीन विधायक गुलाब कमरों पर रेत उत्खनन के मुद्दे पर केवल दिखावटी विरोध करने के आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि भाजपा की सरकार बनने पर क्षेत्र में रेत उत्खनन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। जनसभाओं और पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने यह भी कहा था कि जनता की इच्छा सर्वोपरि होगी और यदि जनता कहेगी तो रेत से भरी गाड़ियों को मौके पर ही रोक दिया जाएगा।
हालांकि, चुनाव के बाद परिस्थितियां इसके उलट दिखाई दे रही हैं। क्षेत्र में रेत उत्खनन की गतिविधियां पहले से अधिक तेज़ होने के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदियों से अवैध रूप से रेत का परिवहन बेरोकटोक जारी है। इतना ही नहीं, कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के इस कारोबार से जुड़े होने के आरोप भी सामने आ रहे हैं।
इन हालातों में जनता सवाल उठा रही है कि क्या चुनावी वादे सिर्फ सत्ता हासिल करने तक सीमित थे? जिन मुद्दों पर पूर्व विधायक को घेरा गया था, वही हालात अब दोबारा क्यों बन रहे हैं? क्या इसे सुशासन कहा जा सकता है?
क्षेत्र के नागरिकों और पत्रकारों की मांग है कि विधायक रेणुका सिंह इस विषय पर सार्वजनिक रूप से प्रेस वार्ता कर स्थिति स्पष्ट करें। साथ ही यदि जनहित वास्तव में प्राथमिकता में है, तो रेत उत्खनन पर तत्काल और प्रभावी रोक लगाकर ठोस कार्रवाई की जाए।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का सवाल पूछना स्वाभाविक है और उन सवालों का जवाब देना जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य। अब देखना यह है कि विधायक इन सवालों पर कब और क्या प्रतिक्रिया देती हैं।






