
दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक सप्ताह पहले खुद को आग लगाने वाली कांग्रेस नेत्री शबाना निशा (37 वर्ष) की इलाज के दौरान मौत हो गई। रायपुर के डीकेएस (DKS) अस्पताल में सात दिनों तक चले उपचार के बाद शुक्रवार, 30 जनवरी को उन्होंने अंतिम सांस ली। घटना उस वक्त हुई थी जब कोर्ट के आदेश पर पुलिस और प्रशासन की टीम उनका घर खाली कराने पहुंची थी।
क्या है पूरा विवाद?
यह दुखद घटना 22 जनवरी की है। शबाना निशा सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के पचरीपारा में फेरू राम के मकान में किराए पर रहती थीं। विवाद की मुख्य वजह मकान का स्वामित्व और कब्जा था:
मकान खरीदने की इच्छा: बताया जा रहा है कि शबाना उसी मकान को खरीदना चाहती थीं, लेकिन मकान मालिक उसे बेचने को तैयार नहीं था।
कानूनी लड़ाई: मकान मालिक शबाना पर घर खाली करने का दबाव बना रहा था और मामला अदालत तक जा पहुँचा था।
कोर्ट का आदेश: जिला न्यायालय ने मकान मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके बाद कोर्ट स्टाफ और पुलिस की टीम कब्जा दिलाने पहुँची थी।
95 प्रतिशत झुलस गई थीं शबाना
जब टीम घर खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर रही थी, तभी शबाना निशा ने अंदर जाकर खुद पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा ली। देखते ही देखते वह आग की लपटों में घिर गईं। मौके पर मौजूद पुलिस और परिजनों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने बताया कि वह 95 प्रतिशत तक झुलस चुकी थीं। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें गंभीर स्थिति में रायपुर रेफर किया गया था।
राजनीतिक परिचय और पुलिस की कार्रवाई
शबाना निशा क्षेत्र की सक्रिय राजनीति में शामिल थीं। वह वार्ड क्रमांक 28 (पचरीपारा) से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद का चुनाव भी लड़ चुकी थीं। उनकी मृत्यु के बाद परिवार में शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पुलिस का पक्ष:
दुर्ग पुलिस के अनुसार, टीम केवल माननीय न्यायालय के आदेश का पालन करने गई थी। इस अप्रत्याशित कदम के बाद पुलिस ने तत्काल सहायता पहुंचाई थी। फिलहाल मर्ग कायम कर मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।






