
✍️ भागीरथी यादव
रायपुर | 03 फरवरी 2026
संघर्ष और अटूट संकल्प की प्रतिमूर्ति सुश्री मधु साहू ने यह साबित कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो शारीरिक अक्षमता कभी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती। 40 प्रतिशत अस्थि बाधित दिव्यांगता और सीमित संसाधनों के बावजूद मधु ने छत्तीसगढ़ अधीनस्थ लेखा सेवा अधिकारी (वित्त विभाग) के पद पर चयनित होकर एक नई मिसाल कायम की है।
चुनौतियों को बनाया अपनी ताकत
रायगढ़ जिले के तमनार ग्राम की रहने वाली मधु साहू के लिए यह सफर आसान नहीं था। शारीरिक कठिनाइयों और प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनकी सफलता के पीछे तीन मुख्य स्तंभ रहे:
नियमित अध्ययन: बिना किसी नागा के पढ़ाई को समय देना।
अनुशासित दिनचर्या: समय प्रबंधन के साथ तैयारी करना।
अडिग आत्मविश्वास: खुद पर भरोसा रखना कि वे यह कर सकती हैं।
शासन का मिला साथ: ‘क्षितिज अपार संभावनाएं’
मधु की इस असाधारण उपलब्धि पर समाज कल्याण विभाग ने उन्हें प्रोत्साहित किया है। विभाग द्वारा संचालित “क्षितिज अपार संभावनाएं” सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के तहत उन्हें 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खाते (DBT) में प्रदान की गई।
“यह आर्थिक सहयोग केवल एक राशि नहीं है, बल्कि मेरे संघर्ष और मेहनत को मिली सरकारी पहचान और सम्मान है।”
— सुश्री मधु साहू
सफलता का श्रेय और संदेश
भावुक होते हुए मधु ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, शिक्षकों, जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग को दिया। उन्होंने कहा कि शासन की इस मदद से उनका विश्वास और मजबूत हुआ है कि राज्य सरकार हर कदम पर दिव्यांग युवाओं के साथ खड़ी है।
मधु साहू की यह कहानी छत्तीसगढ़ के हजारों युवाओं के लिए संदेश है कि जब कड़ी मेहनत और संवेदनशील सरकारी नीतियों का मेल होता है, तो हर ‘असंभव’ लक्ष्य ‘संभव’ हो जाता है।





