
✍️ भागीरथी यादव
पाली | डूमरकछार चौक और आसपास का क्षेत्र इन दिनों अवैध गतिविधियों का केंद्र बन गया है, जिससे स्थानीय आदिवासी समुदाय का भविष्य दांव पर लग गया है। उत्तर प्रदेश से आए एक परिवार द्वारा संचालित अवैध शराब के कारोबार ने न केवल गांव की शांति भंग की है, बल्कि युवाओं और बच्चों को भी नशे के अंधेरे में धकेल दिया है।
प्रमुख बिंदु: संकट के घेरे में गांव
खुलेआम बिक्री: राष्ट्रीय राजमार्ग के ओवरब्रिज के नीचे और सड़क किनारे धड़ल्ले से अवैध शराब बेची जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी शराब भट्टी से स्टॉक लाकर यहाँ ऊंचे दामों और अवैध तरीके से खपाया जाता है।
सरकारी जमीन पर कब्जा: अवैध शराब के साथ-साथ संबंधित परिवार पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर मकान बनाने का भी आरोप है।
दबंगई और धमकियां: जब स्थानीय आदिवासी ग्रामीण इस अवैध कार्य का विरोध करते हैं, तो उन्हें डराया-धमकाया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी पक्ष प्रशासन में ऊंची पहुंच का हवाला देकर उन्हें चुप करा देता है।
प्रशासनिक मौन पर उठते सवाल
इस पूरे मामले में पुलिस और आबकारी विभाग की चुप्पी ने ग्रामीणों के मन में गहरा रोष पैदा कर दिया है। चर्चा है कि इस अवैध कारोबार को कथित तौर पर संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण कार्रवाई फाइलों में ही दबी रह जाती है।
ग्रामीणों की चेतावनी: “अगर प्रशासन ने जल्द ही अवैध कब्जे और शराब की बिक्री पर रोक नहीं लगाई, तो यह स्थिति बड़े सामाजिक संघर्ष का रूप ले सकती है। हमारी संस्कृति और बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है।”






