
✍️ भागीरथी यादव
बीजापुर: महामहिम राष्ट्रपति के बस्तर प्रवास के दौरान बीजापुर जिले में माओवाद उन्मूलन की दिशा में प्रशासन को बड़ी कामयाबी मिली है। छत्तीसगढ़ शासन की ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ (पूना मारगेम) नीति से प्रभावित होकर 30 इनामी माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।
मुख्यधारा में लौटे इनामी कैडर
आत्मसमर्पण करने वाले इन 30 कैडरों में 20 महिलाएं और 10 पुरुष शामिल हैं। इन सभी पर कुल 85 लाख रुपये का इनाम घोषित था। संगठन के लिए सबसे बड़ा झटका नेशनल पार्क एरिया कमेटी की सचिव मंगी का आत्मसमर्पण माना जा रहा है।
पदों का विवरण:
कंपनी सदस्य: 03
एरिया कमेटी मेंबर (ACM): 04
पार्टी सदस्य: 17
अन्य: 06 (पीपीसीएम, DAKMS, KAMS और जनताना सरकार अध्यक्ष)
हथियार और गोला-बारूद सौंपा
आत्मसमर्पण के दौरान कैडरों ने सुरक्षा बलों के समक्ष 50 जिलेटिन स्टिक और कार्डेक्स वायर भी स्वेच्छा से सौंपे। शासन की पुनर्वास नीति के तहत प्रत्येक कैडर को 50,000 रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।
बीजापुर में माओवाद विरोधी अभियान के आंकड़े (1 जनवरी 2024 से अब तक)
विवरण संख्या
मुख्यधारा में लौटे (आत्मसमर्पण) 918
गिरफ्तार माओवादी 1163
मुठभेड़ में मारे गए 232
अधिकारियों का संदेश
डॉ. जितेंद्र कुमार यादव (SP, बीजापुर): उन्होंने अपील की कि माओवादी भ्रमित विचारधारा त्यागकर निर्भय होकर लौटें, शासन उनके सुरक्षित भविष्य की पूरी जिम्मेदारी लेगा।
सुंदरराज पी. पट्टलिंगम (IG, बस्तर रेंज): उन्होंने कहा कि सुदूर अंचलों में सुरक्षा कैंपों और सड़क कनेक्टिविटी के विस्तार से माओवादियों का आधार सिमट रहा है। ‘पूना मारगेम’ अभियान शांति और नए जीवन की राह है।
इन बलों की रही अहम भूमिका
इस सफल अभियान में जिला पुलिस बल, DRG, STF, कोबरा (CoBara) और CRPF की विभिन्न बटालियनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। लगातार बढ़ते दबाव और सुरक्षा बलों के संवेदनशील व्यवहार ने कैडरों को मुख्यधारा में आने के लिए प्रेरित किया।






