नारायणपुर – नक्सल हिंसा की राह छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने वाले आत्मसमर्पित नक्सलियों ने इस बार स्वतंत्रता दिवस को एक नए अंदाज़ में महसूस किया। वर्षों तक हथियार और भय के साये में जीने के बाद जब उन्होंने तिरंगे को सलामी दी और देशभक्ति गीतों पर कदमताल किया तो उनकी आँखों में उम्मीद और चेहरे पर गर्व साफ झलक रहा था।
लाईवलीहुड कॉलेज गरांजी के पुनर्वास केंद्र में रह रहे 11 पुरुष और 19 महिला आत्मसमर्पित नक्सलियों ने पहली बार स्वतंत्रता दिवस का जश्न करीब से देखा और पूरे मनोभाव से हिस्सा लिया। कभी आज़ादी के जश्न से दूरी बनाने वाले इन लोगों ने कहा कि “आज हमें महसूस हुआ कि असली सुख और सम्मान देश के साथ खड़े होने में है।”
सरकार द्वारा चलाए जा रहे पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यक्रम का यह प्रभावशाली नतीजा है कि अब तक बंदूक थामने वाले हाथ तिरंगे को सलामी दे रहे हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों ने इसे अपनी ज़िंदगी का अविस्मरणीय पल बताते हुए कहा कि यह उनके लिए एक नई शुरुआत है।
यह आयोजन उनके लिए केवल एक उत्सव नहीं बल्कि उस नए सफर की शुरुआत है जिसमें वे भय और हिंसा से निकलकर शिक्षा, सम्मान और रोजगार की राह पकड़ रहे हैं।






