
सुशील जायसवाल
राष्ट्रपति दत्तक पुत्र परिवार के साथ हो रहा अन्याय, विभाग की अनदेखी पर ग्रामीणों में आक्रोश
कोरबी/चोटिया। पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के दुरस्थ वनांचल ग्राम पंचायत अडसरा के पंडों बस्ती केंदई की रहने वाली जलेशिया पंडों, पत्नी बाबूलाल पंडों, बीते तीन महीनों से बिना मानदेय के मिनी आंगनबाड़ी केंद्र चला रही हैं।
जलेशिया राष्ट्रपति दत्तक पुत्र परिवार से आती हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो नियुक्ति पत्र मिला है और न ही विभागीय सामग्री। वे अपने टूटे-फूटे कच्चे मकान में 20 नन्हे-मुन्नों को नाश्ता, भोजन बनाकर परोसती हैं और उन्हें पढ़ाती भी हैं। इतना ही नहीं, वे बच्चों को अपने घर से बुलाकर केंद्र तक लाती हैं और शाम को वापस घर तक छोड़कर जाती हैं।
उनका कहना है कि विभाग ने अब तक गैस, चूल्हा, बर्तन, स्टेशनरी या खेलकूद की सामग्री उपलब्ध नहीं कराई है। बच्चों के लिए व्यवस्था न होने पर वे अपने घर के बर्तन और जंगल से लाकर लकड़ी का उपयोग करती हैं। जलेशिया की 10वीं तक की शिक्षा है और वर्षों से गांव में आंगनबाड़ी केंद्र की मांग करती रही थीं। विभाग ने उन्हें मौखिक रूप से केंद्र संचालन की जिम्मेदारी तो दे दी, लेकिन आज तक मानदेय नहीं दिया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि यह राष्ट्रपति दत्तक पुत्र परिवार के साथ घोर अन्याय है। न तो महिला एवं बाल विकास विभाग ने ध्यान दिया है और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने अब तक उनकी पीड़ा समझने की कोशिश की है।
गौरतलब है कि अडसरा पंचायत से करीब 500 मीटर की दूरी पर एसईसीएल की रानी अटारी और विजय वेस्ट खदानें संचालित हैं, जिनसे शासन को करोड़ों का राजस्व प्राप्त होता है। इसके बावजूद पंडों बस्ती जैसे वंचित परिवारों को कोई सुविधा नहीं दी गई।
जलेशिया आर्थिक तंगी से जूझते हुए भी बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए नि:शुल्क सेवा कर रही हैं। अब देखना यह है कि सरकार और विभाग इस पीड़ा को कब गंभीरता से लेकर न्याय दिलाते हैं।






