
आज़ादी के बाद भी सड़क, पानी, बिजली से वंचित – ग्रामीणों ने श्रमदान से सड़क बनाने का लिया निर्णय
सुशील जायसवाल की रिपोर्ट
कोरबा/कोरबी चोटिया :
आज़ादी के 75 साल बाद भी छत्तीसगढ़ का एक गांव सुखा बहरा मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। न तो गांव तक पहुंचने के लिए सड़क है, न शुद्ध पेयजल की सुविधा, और न ही नियमित बिजली आपूर्ति। नाम मात्र के लिए बिजली के खंभे और तार तो लगे हैं, लेकिन रोशनी गांव तक नहीं पहुंच पाती।
ग्रामीणों ने ठाना – श्रमदान से बनेगी सड़क
लगभग 400 की आबादी वाला यह गांव, ग्राम पंचायत पुटी पखना का आश्रित ग्राम है। सड़क व बिजली की बदहाली से त्रस्त ग्रामीणों ने अब खुद आगे बढ़कर श्रमदान से सड़क बनाने की ठानी है। 15 सितंबर से गांव वालों ने श्रमदान कर कच्ची सड़क बनाने की शुरुआत कर दी है। इसमें करीब 100 से अधिक महिला और पुरुष सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं।

बीमारों व गर्भवती महिलाओं को खाट पर ले जाना पड़ता है
वार्ड क्रमांक 4 से 15 तक के पंचों ने बताया कि गांव में पगडंडी और घाट-पहाड़ रास्तों के कारण मरीजों और गर्भवती महिलाओं को आज भी खाट पर लिटाकर मुख्य सड़क तक ले जाया जाता है। बरसात में हालात और बिगड़ जाते हैं, कीचड़ और गड्ढों से होकर गुजरना ग्रामीणों की मजबूरी है।

पंचों की नाराजगी – मांगों को अनदेखा करता है प्रशासन
वार्ड 12 के पंच जय सिंह मरकाम और वार्ड 13 के पंच संतोष मसराम ने बताया कि कई बार पंचायत की बैठकों, शिविरों और सुशासन तिहार में सड़क, पानी और बिजली की मांग उठाई गई, लेकिन प्रशासन द्वारा हर बार अनदेखा कर दिया गया।

ग्रामीणों की मुख्य मांगें
गांव तक पक्की सड़क का निर्माण
शुद्ध पेयजल की व्यवस्था
नियमित बिजली आपूर्ति
ग्रामीणों का स्पष्ट संदेश
“अब और इंतज़ार नहीं… हम खुद सड़क बनाएंगे, लेकिन शासन-प्रशासन को भी जागना होगा और जल्द से जल्द हमारी बुनियादी समस्याओं का समाधान करना होगा।”






