
सुशील जायसवाल, कोरबी चोटिया
ग्राम सिरमिना। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ग्राम सिरमिना स्थित भारत भवन में कोयतुर बहुउद्देश्यीय सेवा समिति के तत्वावधान में एकदिवसीय आर्थिक न्याय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें कोरबा, कोरिया, एमसीबी और सूरजपुर जिलों के सरहदी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

पृष्ठभूमि और उद्देश्य
केंद्र सरकार ने वर्ष 1980 से छठवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान अनुसूचित जाति विशेष घटक योजना (SCP) और अनुसूचित जनजाति उपयोजना (TSP) लागू की थी। इन योजनाओं का उद्देश्य SC-ST वर्गों की जनसंख्या के अनुपात में बजट आवंटन कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। 27 जून 2005 को राष्ट्रीय विकास परिषद ने यह निर्णय लिया था कि इस वर्ग के लिए आवंटित राशि समाप्त नहीं होगी तथा 10 वर्षों में सामाजिक-आर्थिक असमानता को समाप्त करने के प्रयास किए जाएंगे।

योजनाओं का मूल उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल, स्वरोजगार और आजीविका के साधनों को उपलब्ध कराना है। हालांकि अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि हर वर्ष 30 से 35 प्रतिशत बजट खर्च ही नहीं हो पाता, जिससे लक्ष्य समूह पूर्ण लाभ से वंचित रह जाते हैं।
कार्यशाला की मुख्य बातें
मुख्य प्रशिक्षक श्री विनोद कुमार कोशले (संवैधानिक एवं बजट मामलों के जानकार व सह-संस्थापक सोजलिफ़) ने SC/ST उप-योजना के संवैधानिक और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अनुच्छेद 38(2), अनुच्छेद 46 और अनुच्छेद 275(1) के प्रावधानों के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक समता जजमेंट 1997 पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि “यदि योजनाबद्ध बजट का सही क्रियान्वयन हो तो अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के सामाजिक और आर्थिक जीवन में तेजी से बदलाव संभव है। समाज के हर वर्ग को इन योजनाओं की जानकारी होनी चाहिए ताकि वे अपने अधिकारों और अवसरों का उपयोग कर सकें।”
मुख्य बिंदु चर्चा के रहे:
SC/ST विशेष बजट उप-योजना की नीतियां और संवैधानिक प्रावधान।
जनजाति वर्ग के आर्थिक उत्थान में Tribal Sub Plan की भूमिका।
अनुच्छेद 275(1) के तहत केंद्र प्रायोजित योजनाओं का क्रियान्वयन।
समता जजमेंट 1997 का महत्व और उसके प्रभाव।
सफल संचालन और सहभागिता
कार्यशाला का संचालन श्री बनवारी लाल पेन्द्रो ने किया। पूरे कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने न केवल अपने अनुभव साझा किए बल्कि सरकार से यह अपेक्षा भी जताई कि योजनाओं का बजट समय पर और पूरी तरह खर्च हो ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँच सके।






