
बिलासपुर/रतनपुर। परंपरा और विरासत को पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से सर्व आदिवासी समाज इकाई रतनपुर, जिला बिलासपुर ने रविवार, 28 सितंबर 2025 (नवरात्रि षष्ठी) को माँ महामाया दाई को समर्पित “सेवा ध्वजा यात्रा” का भव्य आयोजन किया।
आदिवासी समाज की इस ऐतिहासिक पदयात्रा में हजारों की संख्या में सामाजिक जन पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक वाद्य यंत्रों के साथ शामिल हुए। यात्रा का मुख्य आकर्षण माँ महामाया दाई को अर्पित की गई 100 फीट की चुनरी और नव अन्न भेंट रहा।
इतिहास और महत्व
माँ महामाया दाई रतनपुर रियासत के गोंड़ राजवंश की कुलदेवी रही हैं, जिनका मंदिर आज भी पूरे देश-विदेश में प्रसिद्ध है। परंपरा के अनुसार, वर्षों पहले तक यहाँ आदिवासी गोंड़ पुजारियों द्वारा रूढ़ि और प्रथा अनुसार पूजा-अर्चना (गोंगो) की जाती रही है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह परंपरा बाधित हो गई थी। इसी भूले हुए दायित्व को पुनः जीवित करने और क्षेत्र की खुशहाली की मंगलकामना हेतु इस यात्रा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की झलकियाँ
यात्रा रतनपुर से प्रारंभ होकर पारंपरिक ध्वजा-पताका और समाज के लोगों की भागीदारी के साथ मंदिर तक पहुँची।
माँ महामाया को चुनरी और नया अन्न अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना की गई।
समाज के वरिष्ठजन और युवा वर्ग ने सामूहिक रूप से शक्ति और एकजुटता का संदेश दिया।
मुख्य अतिथि और सहभागी
इस आयोजन में सर्व आदिवासी समाज सेवा समिति रतनपुर इकाई के संरक्षक और पदाधिकारियों में प्रमुख रूप से सुभाष सिंह परते, युवराज सिंह प्रधान, मनोहर सिंह राज, सूरज मरकाम, भागीरथी ध्रुव, बालाराम आर्मो, नंदकिशोर राज, डॉ. संतोष उद्देश्य, आयुष सिंह राज, मनोज मरावी, धनसिंह पोर्ते, शिव नारायण चेचाम, राजेंद्र जगत, भोला देव ध्रुव सहित हजारों की संख्या में सामाजिकजन उपस्थित रहे।
इस भव्य आयोजन ने न केवल समाज की प्रथा और परंपरा को पुनर्जीवित किया बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक धरोहर को संजोने का संकल्प भी दोहराया।






