
✍️ भागीरथी यादव
मध्य प्रदेश में कफ सिरप से बच्चों की दुखद मौत के मामले में एक बाल रोग विशेषज्ञ की गिरफ्तारी के बाद चिकित्सा समुदाय में गहरा आक्रोश है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे अन्यायपूर्ण और अवैज्ञानिक बताया है।
आईएमए ने कहा कि डॉक्टरों को दवाओं के निर्माण में हुई गलती के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत है, क्योंकि यह उनके नियंत्रण और अधिकार क्षेत्र से बाहर की बात है। संगठन का कहना है कि डॉक्टर इलाज करते हैं, दवा नहीं बनाते।
आईएमए ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को इस मामले से अवगत कराते हुए कहा है कि डॉक्टरों पर कार्रवाई से चिकित्सा पेशे का मनोबल गिरता है और यह गलत मिसाल पेश करता है।
संघ ने देशभर के डॉक्टरों से अपील की है कि वे अपने सहकर्मी की रिहाई और मामले की वापसी तक काले बैज या रिबन पहनकर काम करें, ताकि यह शांतिपूर्ण विरोध एकजुटता और न्याय की मांग का प्रतीक बन सके।
आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिलीप भानुशाली और महासचिव डॉ. सरबरी दत्ता ने पत्र जारी कर कहा कि यह आंदोलन चिकित्सा पद्धति के अपराधीकरण के खिलाफ एक मजबूत आवाज बनेगा। उन्होंने डॉक्टरों से अपने संस्थानों और समुदायों में जागरूकता फैलाने का भी आग्रह किया।
आईएमए ने कहा कि बच्चों की मौत अत्यंत दुखद है, लेकिन इसके लिए डॉक्टरों को दोष देना अनुचित है। सरकार को दवा निर्माण कंपनियों और नियामक एजेंसियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए।
संगठन ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल एक डॉक्टर की रिहाई के लिए नहीं, बल्कि पूरे चिकित्सा वर्ग के सम्मान, गरिमा और सुरक्षा की रक्षा के लिए है।






