
✍️ भागीरथी यादव
जुबा (एजेंसी)। दक्षिण सूडान में भारी बारिश और नील नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण भयंकर बाढ़ आई है। अब तक करीब 8.9 लाख लोग प्रभावित हुए हैं — यह संख्या तीन हफ्ते पहले की तुलना में दोगुनी है।
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जोंगलेई और यूनिटी राज्य सबसे अधिक प्रभावित
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के उप-प्रवक्ता फरहान हक ने बताया कि देश के कई हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है और नील नदी का पानी आसपास के इलाकों में भर चुका है।
बाढ़ का सबसे ज़्यादा असर जोंगलेई और यूनिटी राज्यों में देखा जा रहा है, जहाँ हज़ारों लोग ऊँचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
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जीवन अस्त-व्यस्त, राहत कार्य में कठिनाई
फरहान हक ने बताया कि बाढ़ ने लोगों के जीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है।
हज़ारों घरों में पानी भर गया है।
फसलें नष्ट हो गई हैं।
स्कूल, अस्पताल और सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं।
उन्होंने कहा कि राहत कार्य कठिन हो गए हैं क्योंकि कई जगहों पर वाहन और ट्रक नहीं पहुँच पा रहे हैं।

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संयुक्त राष्ट्र और एजेंसियाँ लगातार मदद में जुटीं
संयुक्त राष्ट्र और अन्य राहत संस्थाएँ प्रभावित लोगों को लगातार मदद पहुँचा रही हैं।
उन्हें खाद्य सामग्री, दवाइयाँ, नकद सहायता, तंबू, स्वच्छ पानी और शौचालय की सुविधाएँ दी जा रही हैं।
इसके अलावा, सैंडबैग और अन्य सामग्री बाढ़ रोकने के लिए वितरित की जा रही है।
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आने वाले दिनों में और बारिश की आशंका
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है।
इससे बाढ़ का खतरा अभी भी बरकरार है और स्थिति और बिगड़ सकती है।
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राहत योजना को फंड की कमी से झटका
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, 13 अक्टूबर तक संयुक्त राष्ट्र की 2025 सहायता योजना का लक्ष्य 54 लाख लोगों तक मदद पहुँचाना है।
इस योजना के लिए 1.7 अरब डॉलर की आवश्यकता है, लेकिन अभी तक पर्याप्त धनराशि नहीं मिली है, जिससे राहत कार्यों में देरी हो रही है।
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19 मौतें, 6.39 लाख लोग गंभीर रूप से प्रभावित
अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है और 6,39,225 लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं।
देश के 26 जिले बाढ़ की चपेट में हैं और 121 अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्र पानी में डूब चुके हैं।
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हर साल बढ़ रहा बाढ़ का खतरा
दक्षिण सूडान की भौगोलिक स्थिति बाढ़ के प्रति संवेदनशील है। देश का अधिकांश हिस्सा नीची और समतल भूमि पर बसा है।
विक्टोरिया झील के जलस्तर में बढ़ोतरी से नदियों में पानी का स्तर भी बढ़ जाता है, जिससे हर साल बाढ़ की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं।
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भुखमरी और आजीविका पर संकट
इस बाढ़ से खेती, पशुपालन और घरों को भारी नुकसान पहुँचा है।
खाने-पीने की चीज़ों की कमी से भुखमरी का खतरा भी बढ़ गया है, जबकि लाखों लोग अब भी राहत शिविरों में फँसे हुए हैं।








