
✍️ भागीरथी यादव
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट आज उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगा जिनमें चुनाव आयोग (ECI) द्वारा बिहार में मतदाता सूची की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया शुरू करने के फैसले को चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जारी कारण सूची (Causelist) के अनुसार, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की द्विसदस्यीय पीठ इस मामले की सुनवाई 16 अक्टूबर को फिर से शुरू करेगी।
पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BSLSA) को निर्देश दिया था कि वह जिलों की विधिक सेवा प्राधिकरणों (DLSA) के माध्यम से पैरालीगल वॉलंटियर्स और वकीलों की मदद सुनिश्चित करे ताकि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, वे अपील दाखिल कर सकें।
अदालत ने यह भी कहा था कि डीएलएसए अपने वॉलंटियर्स के संपर्क नंबर सार्वजनिक करें, बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के साथ समन्वय बनाए रखें और यह सुनिश्चित करें कि हर पात्र नागरिक को अपने मतदान अधिकार के संबंध में पूरी जानकारी मिले। कोर्ट ने बीएसएलएसए से एक सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
पिछली सुनवाई में, चुनाव आयोग ने इन आरोपों से इनकार किया कि बिहार में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि एडीआर (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) की ओर से दाखिल हलफनामे गलत हैं।
द्विवेदी ने बताया कि जिन लोगों ने दावा किया कि उनका नाम हटा दिया गया है, वे कभी भी ड्राफ्ट सूची में शामिल ही नहीं थे, क्योंकि उन्होंने आवश्यक पंजीकरण फार्म जमा नहीं किया था। आयोग ने कहा कि झूठे हलफनामे दाखिल करना झूठी गवाही (Perjury) की श्रेणी में आता है।
इस पर अदालत ने अधिवक्ता प्रशांत भूषण पर नाराजगी जताते हुए कहा कि,
> “व्यक्ति को सही जानकारी देनी चाहिए थी, यह ठीक नहीं है।”
भूषण ने कहा कि उनके पास ऐसे 20 अन्य लोगों के हलफनामे हैं और सभी की जांच संभव नहीं है। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की,
> “जब यह हलफनामा गलत निकला है, तो बाकी की प्रामाणिकता पर भी संदेह होता है।”
अदालत ने कहा कि एडीआर की जिम्मेदारी है कि वह अपने दस्तावेजों की सटीकता की पुष्टि करे।
इस बीच, चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है। चुनाव दो चरणों में — 6 नवंबर और 11 नवंबर को होंगे, जबकि मतगणना 14 नवंबर को होगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्यानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बिहार चुनाव को “सभी चुनावों की जननी (Mother of All Elections)” कहा जा सकता है, क्योंकि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए व्यापक तैयारी की गई है।
उन्होंने कहा,
> “हम बिहार के मतदाताओं को भरोसा दिलाना चाहते हैं कि यह चुनाव न केवल निष्पक्ष और पारदर्शी होगा, बल्कि अब तक का सबसे शांतिपूर्ण चुनाव भी होगा।”
इस दौरान उनके साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी मौजूद थे।








