
✍️ भागीरथी यादव
नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2025
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को नई दिल्ली में ‘डिफेंस प्रोक्योरमेंट मैनुअल 2025’ (DPM-2025) जारी किया। यह नया मैनुअल आगामी 1 नवंबर 2025 से प्रभावी होगा। इसके लागू होने से रक्षा मंत्रालय के अधीन तीनों सेनाओं और अन्य प्रतिष्ठानों द्वारा किए जाने वाले लगभग 1 लाख करोड़ रुपए के रेवेन्यू प्रोक्योरमेंट की प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध हो जाएगी।
कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, तीनों सेनाओं के प्रमुख, रक्षा सचिव, डीआरडीओ प्रमुख, तथा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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🔰 प्रक्रियाओं में सरलता और पारदर्शिता पर जोर
रक्षा मंत्री ने मैनुअल के संशोधन में शामिल रक्षा मंत्रालय और एचक्यू इंटिग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह नया मैनुअल रक्षा खरीद प्रक्रिया को एकरूप और पारदर्शी बनाएगा, जिससे सशस्त्र बलों को आवश्यक सामान और सेवाएं समय पर प्राप्त होंगी और उनकी ऑपरेशनल तैयारियां और सशक्त होंगी।
उन्होंने कहा कि इस मैनुअल से एमएसएमई और स्टार्टअप्स को रक्षा उत्पादन और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए अवसर प्राप्त होंगे, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को मजबूती देंगे।
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⚙️ मैनुअल की प्रमुख विशेषताएं
प्रक्रियाओं को सरल और निर्णय प्रक्रिया को तेज करने का प्रावधान।
निर्णय लेने में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा।
सामान्य मामलों में अधिकतम 10% तक ही विलंब शुल्क लगाया जाएगा।
50 लाख रुपए तक की खरीद के लिए सीमित निविदा का प्रावधान।
विशेष परिस्थितियों में इससे अधिक राशि के लिए भी अनुमति दी जा सकेगी।
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🛡️ रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में 79,000 करोड़ के प्रस्ताव स्वीकृत
उसी दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में सशस्त्र बलों की युद्धक क्षमता और सामरिक तैयारी को सुदृढ़ करने हेतु लगभग 79,000 करोड़ रुपए के विभिन्न रक्षा अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
प्रमुख स्वीकृत प्रस्तावों में शामिल हैं —
भारतीय थलसेना के लिए नाग क्षेपणास्त्र प्रणाली (ट्रैक्ड) मार्क-2,
भारतीय नौसेना के लिए 30 मिमी नेवल सरफेस गन,
और भारतीय वायुसेना के लिए कोलैबोरेटिव लॉन्ग रेंज टार्गेट सैचुरेशन/डिस्ट्रक्शन सिस्टम।
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🇮🇳 आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
रक्षा मंत्री ने कहा कि नया मैनुअल और स्वीकृत अधिग्रहण प्रस्ताव भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे। इससे स्थानीय उद्योगों, MSMEs और स्टार्टअप्स को रक्षा क्षेत्र में भागीदारी के अधिक अवसर मिलेंगे।








