
✍️ भागीरथी यादव
कोरबा।
वर्षों से न्याय और रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे खातेदार परिवारों के चेहरों पर आखिरकार उम्मीद की किरण झलक उठी है। सुप्रीम कोर्ट ने एसईसीएल की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें अर्जन के बाद जन्मे पुत्र को रोजगार देने के आदेश को चुनौती दी गई थी। इस निर्णय के साथ अब यह साफ हो गया है कि अर्जन के बाद जन्मा व्यक्ति भी अपने पिता के खातेदारी अधिकारों के आधार पर रोजगार पाने का हकदार है।
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राहुल जायसवाल के संघर्ष ने बदली व्यवस्था की सोच
कुसमुंडा परियोजना के खातेदार के पुत्र राहुल जायसवाल ने वर्ष 2019 में माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका (WPS 6186/2019) दायर की थी।
हाईकोर्ट ने फरवरी 2025 में राहुल को तीन माह के भीतर रोजगार देने का आदेश दिया।
लेकिन एसईसीएल ने इस फैसले के खिलाफ डबल बेंच और फिर सुप्रीम कोर्ट तक अपील की — दोनों ही स्तरों पर एसईसीएल की याचिका खारिज कर दी गई।
यह फैसला केवल राहुल जायसवाल के लिए ही नहीं, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों के लिए भी राहत लेकर आया है जो वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे थे।
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तीन वर्षों से धरना, संघर्ष और उम्मीदों की यात्रा
माटी अधिकार मंच के नेतृत्व में खातेदार परिवारों ने तीन वर्षों तक अनवरत आंदोलन किया।
बिलासपुर मुख्यालय से लेकर कुसमुंडा, गेवरा और दीपका परियोजना तक — हर जगह धरना, गेट जाम और प्रदर्शन हुए।
13–14 अगस्त को एसईसीएल मुख्यालय में अनिश्चितकालीन आंदोलन हुआ और 9 सितंबर को कुसमुंडा महाप्रबंधक कार्यालय के सामने विशाल विरोध प्रदर्शन।
इसके बाद 14 अगस्त, 13 अक्टूबर और 14 अक्टूबर को त्रिपक्षीय वार्ताएं हुईं — जिसमें प्रशासन ने आश्वासन दिया कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद नीति बनाकर सभी पात्रों को रोजगार प्रदान किया जाएगा।
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“अब लड़ाई अंतिम दौर में है” – ब्रजेश कुमार श्रीवास
माटी अधिकार मंच के अध्यक्ष ब्रजेश कुमार श्रीवास ने कहा —
> “एसईसीएल के अधिकारी लगातार लोगों को गुमराह कर रहे थे कि कोर्ट का आदेश केवल एक व्यक्ति पर लागू होगा।
लेकिन यह निर्णय सार्वभौम सिद्धांत पर आधारित है — अब हर अर्जन के बाद जन्मा खातेदार पुत्र रोजगार पाने का हकदार है।”
उन्होंने आगे कहा —
> “जब तक हर पात्र परिवार को उसका अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक संगठन का संघर्ष जारी रहेगा।”
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आगामी रणनीति 2 नवंबर को तय होगी
माटी अधिकार मंच की अगली बैठक 2 नवंबर को आयोजित की जाएगी।
इसमें रोजगार की प्रक्रिया, खाता संयोजन और अन्य लंबित मुद्दों पर चर्चा कर आंदोलन की नई रणनीति तय की जाएगी।
यदि एसईसीएल ने आदेश लागू करने में देरी या आनाकानी की, तो संगठन मुख्यालय और एरिया स्तर पर उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दे चुका है।
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एक उम्मीद, जो अब हकीकत बनी
यह निर्णय उन परिवारों के लिए एक नई सुबह लेकर आया है, जिनकी पीढ़ियाँ अपनी मिट्टी के बदले न्याय की आस में खड़ी थीं।
अब माटी अधिकार मंच के संघर्ष और न्यायपालिका के फैसले ने यह साबित कर दि
या है —
> “जिस धरती ने दिया, उसका हक कोई नहीं छीन सकता।”






