
✍️ भागीरथी यादव
धरमजयगढ़// धरमजयगढ़ वनमंडल के छाल परिक्षेत्र अंतर्गत औरानारा परिसर में एक मादा जंगली हाथी शावक का शव मिलने से क्षेत्र में वन विभाग हरकत में आ गया। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि शावक की मृत्यु पानी में डूबने से हुई है।
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 28 अक्टूबर की शाम लगभग 4 बजे स्थानीय ग्रामीणों ने सराईमुड़ा तालाब (परिसर कक्ष क्रमांक 517 आर.एफ.) के किनारे शावक का शव देखा। सूचना मिलते ही परिक्षेत्राधिकारी और वन अमला मौके पर पहुंचे। सूर्यास्त होने के कारण पोस्टमार्टम की कार्रवाई 29 अक्टूबर की सुबह की गई।
वनमंडलाधिकारी, परिक्षेत्राधिकारी और जिला स्तर की तीन सदस्यीय पशु चिकित्सा टीम — जिसमें धरमजयगढ़ के डॉ. विवेक नायक, रायगढ़ के डॉ. नरेंद्र नायक और छाल के डॉ. आशीष राठिया शामिल थे — ने स्थल का निरीक्षण कर नियमानुसार शव विच्छेदन किया। पशु चिकित्सकों की रिपोर्ट के अनुसार, शावक की मृत्यु पानी में डूबने से हुई है। पोस्टमार्टम के बाद शव को वन अधिकारियों की उपस्थिति में दफनाया गया।
वन विभाग ने बताया कि पिछले कई दिनों से छाल परिक्षेत्र के औरानारा परिसर में लगभग 22 हाथियों का दल विचरण कर रहा था। संभावना जताई जा रही है कि यह मादा शावक अपने झुंड के साथ पानी पीने और जलक्रीड़ा के दौरान तालाब की गहराई में चली गई, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।
इस संबंध में डीएफओ धरमजयगढ़ श्री जितेंद्र उपाध्याय ने बताया कि घटना की विस्तृत जांच जारी है। उन्होंने कहा कि यह मृत्यु आकस्मिक प्रतीत होती है। हाथियों के दल पर सतत निगरानी रखी जा रही है तथा मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम के लिए वन अमले को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों के झुंड के निकट न जाएं और किसी भी असामान्य गतिविधि की सूचना तुरंत निकटतम वन परिक्षेत्र कार्यालय को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।





