
✍️ भागीरथी यादव
नवा रायपुर। नवा रायपुर में जारी पांच दिवसीय राज्योत्सव में इस वर्ष परंपरा, संस्कृति और आत्मनिर्भरता का शानदार संगम देखने को मिल रहा है। राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे नाबार्ड सहायतित स्व-सहायता समूहों ने अपनी पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और नवाचार से लोगों का दिल जीत लिया है।
राजनांदगांव जिले के जय सेवा हस्तशिल्प आर्ट गायत्री स्व-सहायता समूह ने अपने कलात्मक हुनर और उद्यमशीलता का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सबका ध्यान आकर्षित किया। समूह की महिलाएं मिट्टी, बांस और वस्त्र कला के क्षेत्र में विशेष पहचान बना रही हैं। उनके द्वारा तैयार किए गए झूमर, दिया स्टैंड, फूलदानी, लैम्प, हैंगर, कुर्ती ड्रेस और ज्वेलरी जैसे उत्पाद स्टॉल पर आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
नाबार्ड के सहयोग से संचालित अन्य समूहों ने भी अपने हुनर की झलक प्रस्तुत की। बांस कला से बने टी-ट्रे, सजावटी वस्तुएं, कपड़ों पर हेंड प्रिंटिंग, गोदना आर्ट, कोसा सिल्क, खादी सिल्क और कॉटन पर पारंपरिक लोककला डिज़ाइनिंग ने आगंतुकों को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का अनुभव कराया।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में नाबार्ड की भूमिका सराहनीय रही है। संस्था न केवल स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग प्रदान कर रही है, बल्कि विपणन और पैकेजिंग जैसे आधुनिक कौशल भी सिखा रही है। इन प्रशिक्षणों से महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में योगदान दे रही हैं।
राज्योत्सव में जय सेवा हस्तशिल्प आर्ट, शबरी मार्ट, बांस हस्तशिल्प, कोसा सिल्क और खादी कला प्रदर्शनी जैसे स्टॉलों ने दर्शकों का विशेष ध्यान खींचा। इन स्टॉलों पर परंपरा, पर्यावरण और उद्यमशीलता का सुंदर मिश्रण देखने को मिला। महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की बिक्री से उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो रही है और आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है।
राज्य में नाबार्ड द्वारा कृषि, ग्रामीण उद्यम, बांस मिशन, महिला आजीविका कार्यक्रम, किसान क्लब और कौशल विकास प्रशिक्षण जैसे अनेक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन पहलों से हजारों महिलाएं और युवा आत्मनिर्भर बनकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं।






