
✍️ भागीरथी यादव
मुंगेली। मार्गशीर्ष (अगहन) मास 6 नवंबर से प्रारंभ हो चुका है और 4 दिसंबर तक चलेगा। इस अवसर पर ख्यातिलब्ध आयुर्वेद चिकित्सक एवं नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने मौसम के अनुरूप आहार-विहार को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
डॉ. शर्मा ने बताया कि इस माह में शीतल हवाओं के प्रभाव से कफ संचय और वात दोष बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे संधिशूल, श्वास-समस्याएं और त्वचा रोगों की आशंका बढ़ जाती है। इस अवधि में जठराग्नि तीव्र होती है, इसलिए शरीर पौष्टिक और स्निग्ध पदार्थों को अच्छी तरह पचा पाता है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि मार्गशीर्ष मास में जीरे का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। वहीं वसायुक्त भोजन और शहद का सेवन शरीर के लिए हितकारी माना गया है।
डॉ. शर्मा के अनुसार यह हेमंत ऋतु का महीना शक्ति संचय का काल होता है, ऐसे में च्यवनप्राश, अश्वगंधा, आंवला, शतावर जैसी आयुर्वेदिक रसायन औषधियों का प्रकृति अनुसार सेवन लाभदायक हो सकता है।
क्या खाएँ
बाजरा, मक्का
गाजर, मूली
अदरक, सूखा नारियल, सौंठ
मधुर रस युक्त एवं स्निग्ध, वसायुक्त पौष्टिक भोजन
क्या न खाएँ
जीरा
इमली, मोंठ दाल
ककड़ी, खरबूजा, तरबूज
कटु, कषाय रस वाले तथा अतिशीत या रुक्ष खाद्य पदार्थ
दिनचर्या में क्या करें
अभ्यंग (तेल मालिश)
धूप सेवन (आतप स्नान)
हल्का व्यायाम
गर्म पानी से स्नान
ठंड से बचाव के लिए शरीर ढककर रखना
क्या न करें
दिन में सोना
देर रात तक जागना
ठंडे पेय पदार्थ
भूखे रहना या बहुत कम भोजन
ठंडी तेज हवाओं के संपर्क में आना
डॉ. शर्मा ने कहा कि मार्गशीर्ष माह में सही आहार-विहार अपनाकर सम्पूर्ण वर्ष के लिए स्वास्थ्य और ऊर्जा की मजबूत नींव रखी जा सकती है।
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