
✍️ भागीरथी यादव
गैबोरोन/नई दिल्ली- भारत और बोत्सवाना के बीच वन्यजीव संरक्षण साझेदारी में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, बोत्सवाना ने ‘प्रोजेक्ट चीता’ के अगले चरण के तहत औपचारिक रूप से भारत को आठ चीते सौंपे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और बोत्सवाना के राष्ट्रपति ड्यूमा गिदोन बोको ने मिलकर इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।
गैबोरोन स्थित मोकोलोडी नेचर रिजर्व में आयोजित समारोह के दौरान, दोनों राष्ट्रपतियों ने बोत्सवाना के घांजी क्षेत्र से पकड़े गए चीतों को क्वारंटाइन सेंटर में छोड़े जाते देखा। यह कार्यक्रम भारत और बोत्सवाना के बीच वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में गहरी होती साझेदारी का प्रतीक बना।

राष्ट्रपति मुर्मु की यह बोत्सवाना की पहली राजकीय यात्रा है। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कहा गया —
> “भारत-बोत्सवाना वन्यजीव संरक्षण साझेदारी में एक नया अध्याय। यह पहल दोनों देशों के पर्यावरणीय सहयोग को नई दिशा देगी।”
विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह पहल भारत के ‘प्रोजेक्ट चीता’ के अगले चरण की एक बड़ी उपलब्धि है, जो विलुप्तप्राय प्रजातियों के पुनर्वास और संरक्षण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत करती है।

बोत्सवाना में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा —
> “मुझे बताया गया है कि बोत्सवाना में करीब 10 हजार भारतीय नागरिक विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं। आप सभी भारत के गौरवशाली राजदूत हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और बोत्सवाना वर्ष 2026 में राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ मनाएंगे। दोनों देश हीरा उद्योग (डायमंड सेक्टर) में लंबे समय से साझेदार हैं, और अब रक्षा, प्रौद्योगिकी और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत की प्रगति पर बोलते हुए कहा —
> “भारत आज एक परिवर्तनकारी दौर में है। हमारी युवा शक्ति, मजबूत अर्थव्यवस्था और इनोवेशन की भावना हमें 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे ले जा रही है। ‘डिजिटल इंडिया’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘स्वच्छ भारत’ जैसी पहल भारत के नवोन्मेषी भविष्य की पहचान बन चुकी हैं।”
यह दौरा न केवल भारत-बोत्सवाना संबंधों को नई मजबूती प्रदान करेगा, बल्कि अफ्रीका में भारत की वन्यजीव संरक्षण साझेदारी को भी नई दिशा देगा।








