पटना में बड़ा राजनीतिक बवाल: RJD एमएलसी सुनील सिंह के खिलाफ साइबर थाने में FIR, ‘नेपाल जैसा नज़ारा’ बयान पर हंगामा

✍️ भागीरथी यादव 

 

पटना, 13 नवंबर 2025 —

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना से जुड़ा एक बयान अब सियासी और कानूनी विवाद का कारण बन गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) सुनील सिंह के खिलाफ पटना साइबर थाना में भड़काऊ और अपमानजनक बयान देने के आरोप में गंभीर मामला दर्ज किया गया है।

यह शिकायत पुलिस अवर निरीक्षक (SI) खुशबू कुमारी द्वारा 13 नवंबर को दर्ज कराई गई। शिकायत के अनुसार, एमएलसी सुनील सिंह ने सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर मतगणना प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए एक विवादित बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा कि—

> “अगर मतगणना में गड़बड़ी हुई तो बिहार की सड़कों पर नेपाल जैसा नज़ारा दिखेगा।”

🔴 पुलिस का आरोप: “बयान भड़काऊ और विधि-व्यवस्था के लिए खतरा”

शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस बयान में सामाजिक वैमनस्य, घृणा फैलाने, और लोक शांति भंग करने की क्षमता है। पुलिस का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी जनभावनाओं को भड़काने और विभिन्न समुदायों के बीच तनाव पैदा करने वाली है, जिससे राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

⚖️ कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज

पुलिस ने सुनील सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA) की कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। इनमें प्रमुख धाराएं हैं:

 

BNS की धारा 174 – लोक सेवक द्वारा विधि का उल्लंघन,

 

धारा 353 – लोक सेवक के कार्य में बाधा डालना,

 

धारा 352 – शांति भंग करने का प्रयास,

 

धारा 123(4) व 125 (RPA) – चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने और समाज में वैमनस्य फैलाने से संबंधित प्रावधान।

🕵️ जांच की जिम्मेदारी DySP मिथलेश कुमार को

इस संवेदनशील मामले की जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी मिथलेश कुमार को सौंपी गई है। वे बयान की प्रामाणिकता, वीडियो/पोस्ट के स्रोत, और संभावित आपराधिक इरादे की दिशा में जांच कर रहे हैं।

📱 सोशल मीडिया पर बयान की तलाश

पुलिस टीम फिलहाल एमएलसी सुनील सिंह के सोशल मीडिया अकाउंट्स और वायरल वीडियो की जांच में जुटी है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या बयान किसी सार्वजनिक सभा या डिजिटल मंच पर दिया गया था।

🗣️ राजनीतिक हलकों में हलचल

राजद खेमे ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है, जबकि विपक्षी दलों ने इसे “लोकतंत्र के खिलाफ भड़काऊ राजनीति” का उदाहरण कहा है। चुनावी मौसम में यह मामला अब बिहार की राजनीति में नया तूल पकड़ चुका है।