MP के वायरल डीएसपी के नाम पर 72 लाख की ठगी

✍️ भागीरथी यादव

 

चार साल तक खुद को ‘डीएसपी’ बताकर महिला को छलता रहा जेसीबी ऑपरेटर, छत्तीसगढ़ पुलिस ने खोला बड़ा फर्जीवाड़ा

मध्य प्रदेश पुलिस के लोकप्रिय अधिकारी और सोशल मीडिया पर 2.2 मिलियन फॉलोअर्स वाले डीएसपी संतोष पटेल भी तब सन्न रह गए, जब उन्हें पता चला कि उनके नाम का इस्तेमाल कर छत्तीसगढ़ की एक आदिवासी महिला से 72 लाख रुपए की ठगी की गई है। मामला तब सामने आया जब पीड़िता की शिकायत सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच गई और छत्तीसगढ़ पुलिस जांच करते हुए एमपी पहुंची।

लेकिन जब पुलिस ने असली डीएसपी संतोष पटेल से संपर्क किया तो चौकाने वाली सच्चाई धीरे-धीरे सामने आने लगी—ठगी करने वाला कोई अधिकारी नहीं, बल्कि एक जेसीबी ऑपरेटर था, जो उनकी वर्दी वाली तस्वीर को DP बनाकर चार वर्षों तक महिला को बहला-फुसलाता रहा।

कैसे शुरू हुआ फर्जी डीएसपी का खेल?

बलरामपुर जिले के कुसमी थाने में एक आदिवासी महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि मध्य प्रदेश के डीएसपी संतोष पटेल ने उसके दो बेटों को पुलिस में भर्ती कराने का लालच देकर 72 लाख रुपए ऐंठ लिए।

महिला का कहना था कि उसने आरोपी को कभी देखा नहीं,
बातचीत सिर्फ फोन और व्हाट्सऐप कॉल पर होती थी,
DP पर डीएसपी की फोटो लगी रहती थी,
वह कभी वीडियो कॉल भी नहीं करता था।
महिला को पूरा भरोसा था कि वह “वायरल डीएसपी संतोष पटेल” से बात कर रही है।

छत्तीसगढ़ पुलिस की जांच—सच्चाई का धमाका

जब छत्तीसगढ़ पुलिस की टीम बालाघाट पहुंची और असली डीएसपी संतोष पटेल को दस्तावेज दिखाए, तो अधिकारी खुद हैरान रह गए।

उन्होंने कहा—

> “मैं तो महिला को जानता भी नहीं। मेरी फोटो किसने इस्तेमाल की, ये देख मैं भी चौंक गया।”

जांच में पता चला कि असली आरोपी संतोष पटेल पुत्र विश्वनाथ पटेल, निवासी — पड़खुरी पचोखर, थाना चुरहट, जिला सीधी (एमपी) है।

साल 2016 में वह छत्तीसगढ़ में सड़क निर्माण प्रोजेक्ट में जेसीबी ऑपरेटर था।

वहीं उसकी पहचान कंजिया गांव की ललकी बाई से हुई।

गांव लौटने के बाद उसने महिला को फोन कर कहा—

“मैं अब एमपी पुलिस में डीएसपी बन गया हूं, तुम्हारे बेटे भी पैसे देकर पुलिस में लग जाएंगे।”

चार वर्षों (2018–2025) के दौरान उसने महिला से लगभग 72 लाख रुपए फोन-पे और अन्य माध्यमों से वसूल लिए।

महिला ने रिश्तेदारों से उधार लिया, जमीन बेची और आरोपी की बातों में आती रही।

12 नवंबर को आरोपी को पुलिस ने पकड़ लिया। पूछताछ में उसने सारा पैसा उड़ाने की बात स्वीकार की है।

“मुझे डर लगा कहीं मेरे नाम का कोई करीबी तो…” —DSP संतोष पटेल

डीएसपी ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि उनके नाम से PMO में शिकायत पहुंची है तो वे खुद घबरा गए।

फिर जब कुसमी पुलिस की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया तो उन्होंने कहा—

> “मैं छत्तीसगढ़ पुलिस का आभारी हूं। लोगों से अपील है कि सरकारी नौकरी के नाम पर किसी को भी पैसा न दें। आज सभी भर्तियां पारदर्शी तरीके से होती हैं।”

सबक—सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी से बचें

यह घटना बताती है कि

सरकारी नौकरी पैसों से नहीं मिलती,

ठग फर्जी पहचान, वर्दी और सोशल मीडिया फोटो का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं,

किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या एजेंट को पैसे न दें,

शंका होने पर तुरंत नजदीकी थाने में शिकायत करें।

छत्तीसगढ़ पुलिस ने पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है और मामले में आगे की जांच के निर्देश दिए गए हैं।

यह मामला सोशल मीडिया के दौर में पहचान की चोरी और नौकरी के लालच में होने वाली ठगी का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है।

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