
✍️ भागीरथी यादव
काला हिरण संरक्षण मॉडल को मिलेगी राज्यभर में विस्तार
नवा रायपुर।
छत्तीसगढ़ वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन श्री अरुण कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में आरण्य भवन में गुरुवार को वन्यजीव संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन भैंसा (वाइल्ड बफैलो) के संरक्षण, संख्या वृद्धि, जियो-मैपिंग, स्थानांतरण और वैज्ञानिक प्रबंधन पर विस्तृत रणनीति तैयार की गई। राज्य के राजकीय पशु वन भैंसा के भविष्य को सुरक्षित करने हेतु सभी विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों के साथ गहन चर्चा की गई
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वन भैंसा संरक्षण : वैज्ञानिक प्रयासों को नई गति देने का निर्णय
बैठक की शुरुआत में वन भैंसा की मौजूदा स्थिति, अब तक हुए संरक्षण कार्यों और आगे की चुनौतियों पर चर्चा की गई।
डॉ. आर.पी. मिश्रा ने विस्तृत प्रेजेंटेशन देते हुए बताया कि वन भैंसा प्रदेश का तीसरा सबसे बड़ा वन्यजीव है और इसकी शुद्ध नस्ल को बचाने के लिए आधुनिक व वैज्ञानिक प्रयास अनिवार्य हैं।
श्री पाण्डेय ने कहा कि—
“राजकीय पशु वन भैंसा की सुरक्षा और संख्या वृद्धि राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए सभी सम्बंधित इकाइयों का समन्वित प्रयास आवश्यक है।”
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उदंती-सीतानदी और बारनवापारा : संरक्षण के प्रमुख केंद्र
बैठक में बताया गया कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और बारनवापारा अभयारण्य वन भैंसा संरक्षण के लिए अनुकूल साबित हुए हैं।
वर्तमान में बारनवापारा में 1 नर और 5 मादा वन भैंसे मौजूद हैं।
वन भैंसों की वास्तविक संख्या और शुद्ध नस्ल की पहचान के लिए जियो-मैपिंग तकनीक लागू करने का निर्णय लिया गया।
साथ ही वन्यजीवों के खानपान, रहवास सुधार, स्वास्थ्य देखभाल और निगरानी तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
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स्थानांतरण प्रक्रिया तेज—दिल्ली भेजा जाएगा विशेष दल
बैठक में यह निर्णय हुआ कि वन भैंसों के स्थानांतरण के लिए
नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्डलाइफ और NTCA से आवश्यक अनुमतियाँ शीघ्र प्राप्त की जाएँगी।
इस संबंध में एक विशेष दल (डेलिगेशन) जल्द ही दिल्ली जाकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।
वन भैंसों की चिकित्सा सुरक्षा के लिए दो पूर्णकालिक पशु चिकित्सकों की तैनाती का भी निर्णय लिया गया।
वहीं सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) से अनुमति लेकर सैटेलाइट-आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है।
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काला हिरण संरक्षण : 190 की संख्या पहुँची, अब अन्य अभयारण्यों में विस्तार
बैठक में काला हिरण (Blackbuck) संरक्षण पर भी चर्चा हुई।
बताया गया कि वर्ष 2018 में 50 वर्षों बाद बारनवापारा में काला हिरण पुनर्स्थापन शुरू किया गया था।
सुधारित रेत व जल निकासी प्रणाली, पोषण निगरानी, और समर्पित टीम तैनात करने जैसे प्रयासों के परिणामस्वरूप
आज बारनवापारा में लगभग 190 काले हिरण मौजूद हैं।
इस मॉडल की सफलता को देखते हुए, अब राज्य के अन्य अभयारण्यों में भी काला हिरण पुनर्स्थापन कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी है।
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वरिष्ठ विशेषज्ञों की मौजूदगी में बनी व्यापक रणनीति
बैठक में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े देश-प्रदेश के प्रमुख विशेषज्ञ मौजूद रहे, जिनमें—
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) श्री व्ही. माधेश्वरन,
क्षेत्रीय निदेशक उदंती-सीतानदी सुश्री सतीविशा समाजदार,
DFO बलौदाबाजार श्री धम्मशील गनवीर,
उप संचालक इंद्रावती श्री संदीप बलगा,
वैज्ञानिक डॉ. सम्राट मंडल, डॉ. विवश पांडेव,
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. राहुल कौल, डॉ. संदीप तिवारी,
सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और वैज्ञानिक शामिल रहे।





