
✍️ भागीरथी यादव
नई दिल्ली।
सरकार ने बीते शुक्रवार को देश के श्रम ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए चार नए लेबर कोड लागू कर दिए। कोड ऑन वेजेज (2019), इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड (2020), कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (2020) और Occupational Safety, Health and Working Conditions (OSHWC) Code (2020) अब कुल 29 पुराने केंद्रीय श्रम कानूनों की जगह लेंगे। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य कार्यस्थलों को अधिक आधुनिक, सरल और प्रभावी बनाना है, विशेषकर महिलाओं के लिए सुरक्षित, न्यायसंगत और लचीला माहौल तैयार करना।
महिलाओं की नौकरी में भागीदारी बढ़ाने पर फोकस
सरकार का कहना है कि नए लेबर कोड महिलाओं की रोजगार से जुड़ी चुनौतियों को कम करेंगे और उन्हें अधिक अधिकारों व सुरक्षा के साथ काम करने का अवसर देंगे। इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड के तहत अब हर शिकायत निवारण समिति में महिलाओं का अनुपातिक प्रतिनिधित्व अनिवार्य होगा, जिससे वे कार्यस्थल पर उत्पीड़न, सुरक्षा और विवादों से जुड़े मुद्दों को बेझिझक उठा सकेंगी।
मातृत्व सुरक्षा और पेड लीव में बड़ी राहत
कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी महिलाओं को अब कम से कम 80 दिन काम करने पर 26 सप्ताह तक का पेड मैटरनिटी लीव प्रदान करता है। इनमें से आठ सप्ताह प्रसव पूर्व लिए जा सकते हैं। गोद लेने वाली और सरोगेसी से मातृत्व प्राप्त करने वाली महिलाओं को भी 12 सप्ताह की छुट्टी का अधिकार मिलेगा।
यदि नियोक्ता प्रसव पूर्व/पश्चात चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध नहीं कराता, तो महिलाओं को 3,500 रुपये का मेडिकल बोनस दिया जाएगा। बच्चे के 15 महीने होने तक प्रतिदिन दो बार स्तनपान अवकाश भी मिलेगा। साथ ही, 50 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में क्रेच सुविधा अनिवार्य होगी।
वर्क-फ्रॉम-होम और रात की शिफ्ट में काम की अनुमति
प्रसव या गोद लेने के बाद, यदि परिस्थितियां अनुकूल हों, तो महिलाएं नियोक्ता की सहमति से वर्क-फ्रॉम-होम कर सकेंगी।
OSHWC कोड महिलाओं को सुरक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होने की शर्त पर रात 7 बजे के बाद और सुबह 6 बजे से पहले काम करने की अनुमति देता है। इससे उन क्षेत्रों में भी महिला रोजगार बढ़ने की उम्मीद है जहां पहले रात की शिफ्ट में काम की अनुमति सीमित थी।
समान वेतन और लैंगिक भेदभाव पर सख्ती
कोड ऑन वेजेज के तहत भर्ती, वेतन और काम की शर्तों में लैंगिक भेदभाव पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। समान कार्य के लिए समान वेतन महिलाओं का सुनिश्चित अधिकार होगा। केंद्र और राज्य स्तर पर Advisory Boards में एक-तिहाई महिला प्रतिनिधित्व अनिवार्य किया गया है, ताकि वे न्यूनतम वेतन, रोजगार और नीति निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
महिलाओं के लिए रोजगार का नया युग
नए लेबर कोड महिलाओं को न केवल सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें मातृत्व, निर्णय लेने, बच्चों की देखभाल और करियर में निरंतरता के लिए मजबूत आधार भी देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन सुधारों से महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी बढ़ेगी और भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
सरकार का यह कदम श्रम बाजार को आधुनिक और समावेशी बनाने की दिशा में एक निर्णायक बदलाव माना जा रहा है।








