
✍️ भागीरथी यादव
मणिपुर के तेंगनौपाल जिले में भारत–म्यांमार सीमा के पास शुक्रवार सुबह अज्ञात सशस्त्र आतंकियों ने असम राइफल्स की तीसरी बटालियन की पेट्रोलिंग पार्टी पर घात लगाकर भीषण हमला कर दिया। घटना सीमा स्तंभ 85 से 87 के बीच स्थित सेबोल (साइबोल) गांव के करीब हुई, जो इम्फाल से लगभग 100 किमी दूर है।
अचानक हुई इस अंधाधुंध गोलीबारी में चार जवान घायल हो गए, जिनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को हेलीकॉप्टर से इम्फाल ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।
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कैसे हुआ हमला?
घटना सुबह करीब 4:30 बजे की है। असम राइफल्स के जवान नियमित गश्त पर थे, तभी पहाड़ी व घने जंगलों में छिपे आतंकियों ने अचानक आधुनिक हथियारों और विस्फोटकों से फायरिंग शुरू कर दी। करीब 30 मिनट तक चली इस मुठभेड़ में हमलावरों ने बम का भी इस्तेमाल किया।
जवानों ने जवाबी कार्रवाई की, लेकिन आसपास के गांवों में किसी नागरिक को नुकसान न पहुंचे, इस वजह से संयमित फायरिंग की गई। भारी गोलीबारी के बाद आतंकी म्यांमार की ओर भाग निकले। अभी तक किसी आतंकी के मारे जाने या पकड़े जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार—
“हमलावर संभवतः म्यांमार से आए घुसपैठिए थे, जो सीमा क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं।”
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बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन
हमले के बाद इलाके में असम राइफल्स और भारतीय सेना की संयुक्त टीमों ने कंबिंग, कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
सीमा पर अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं ताकि किसी भी संभावित घुसपैठ को रोका जा सके। सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
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कौन हो सकता है हमले के पीछे?
अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
हालाँकि, सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इसके पीछे—
संयुक्त कुकी नेशनल आर्मी (UNKA)
या अन्य सीमा-पार सक्रिय उग्रवादी समूह का हाथ हो सकता है।
यह वही क्षेत्र है जहां हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। अगस्त 2025 में इसी इलाके से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के चार कैडर गिरफ्तार किए गए थे।
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सीमा क्षेत्र की चुनौतियाँ बढ़ीं
भारत–म्यांमार सीमा की 398 किमी लंबी खुली सीमा चंदेल, तेंगनौपाल, उखरुल और चुराचांदपुर जिलों तक फैली है।
यह क्षेत्र लंबे समय से—
उग्रवाद
तस्करी
जातीय तनाव का केंद्र रहा है।
म्यांमार में सैन्य उथल-पुथल के बाद सीमा पार से उग्रवादियों की गतिविधियां और बढ़ गई हैं। इसी कारण असम राइफल्स पर इस संवेदनशील इलाके में लगातार दबाव बना हुआ है।—
तेंगनौपाल में हुआ यह ताजा हमला सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है और यह संकेत देता है कि सीमा पार से घुसपैठ करने वाले उग्रवादी अब और अधिक सक्रिय हो रहे हैं।








