✍️ भागीरथी यादव
ग्राम पंचायत से लेकर विधायक तक उठी ज़बरदस्त आपत्ति, विभाग पर बढ़ा दबाव**
भिलाई बाजार/कटघोरा (कोरबा)। दीपका क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को वर्षों से मजबूत और सुचारु बनाए रखने वाले सहायक अभियंता श्री सरेंद्र दिवाकर के स्थानांतरण ने क्षेत्र में गहरी नाराज़गी पैदा कर दी है। ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और ग्राम पंचायत के बाद अब स्थानीय विधायक प्रेमचंद पटेल भी खुलकर उनके समर्थन में उतर आए हैं। इससे स्थानांतरण रोकने के लिए विभाग पर भारी दबाव बन गया है।
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ग्राम पंचायत ने मोर्चा खोला, कहा— “यह जनता से छेड़छाड़ जैसा निर्णय”
ग्राम पंचायत भिलाई बाजार की सरपंच श्रीमती रजनी मरकाम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दिवाकर का स्थानांतरण जनहित के प्रतिकूल है।
अपने पत्र में उन्होंने लिखा—
> “दिवाकर की कार्यकुशलता, तत्परता और संवेदनशीलता से दीपका क्षेत्र में बिजली व्यवस्था हमेशा बेहतर रही है। किसी भी समय समस्या बताने पर उनका समाधान तत्काल मिलता है। ऐसे अधिकारी का स्थानांतरण जनता के साथ अन्याय है।”
पंचायत ने यह भी बताया कि दीपका क्षेत्र के अंतर्गत लगभग 100 से अधिक ग्राम पंचायतें और नगर पालिका क्षेत्र आते हैं। दिवाकर की सेवाओं के कारण बिजली संबंधी शिकायतें वर्षों से नियंत्रित रहीं, इसलिए अचानक स्थानांतरण को अव्यवस्था की आशंका के रूप में देखा जा रहा है।
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विधायक का सख्त रुख— स्थानांतरण रोकने की अनुशंसा
पंचायत से आवेदन मिलने के बाद विधायक प्रेमचंद पटेल ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर दिवाकर का स्थानांतरण रोकने की दृढ़ अनुशंसा की है।
उन्होंने कहा—
> “जनता का भरोसा जीतने वाले अधिकारी को बिना किसी विशेष कारण हटाना उचित नहीं है। क्षेत्र की मांग को देखते हुए स्थानांतरण तत्काल निरस्त किया जाए।”
विधायक ने अपने पत्र की प्रतिलिपि बिलासपुर और कोरबा के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजकर मामले की गंभीरता बढ़ा दी है।
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ग्रामीणों की चेतावनी— ‘फैसला वापस नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन होगा’
दीपका क्षेत्र के ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि स्थानांतरण आदेश में संशोधन नहीं किया गया तो वे सड़क से कार्यालय तक आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है—
> “दिवाकर के रहते बिजली कटौती, ट्रांसफॉर्मर खराबी और लाइन फॉल्ट जैसी समस्याएँ लगभग खत्म हो चुकी थीं। उनका तबादला पूरे क्षेत्र के लिए नुकसानदायक होगा।”
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अब विभाग की परीक्षा— जनता की मांग मानेगा या औपचारिक नीति?
जनप्रतिनिधियों और विधायक के विरोध के बाद अब गेंद ऊर्जा विभाग के पाले में है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग जनता की संतुष्टि को प्राथमिकता देता है या फिर औपचारिक स्थानांतरण नीति को आगे रखता है।
फिलहाल दीपका क्षेत्र में सिर्फ एक ही आवाज गूंज रही है—
> “दिवाकर को वापस रखो… यही जनता की मांग है।”






