
113 परिवारों की बेदखली के खिलाफ शहर में जोरदार विरोध
बिलासपुर :- लिंगियाडीह बचाओ सर्वदलीय अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन 18वें दिन निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया। आज धरना स्थल पर उमड़े अभूतपूर्व जनसैलाब ने साफ कर दिया कि यह संघर्ष अब सिर्फ एक मोहल्ले का नहीं, बल्कि पूरे शहर की सामूहिक लड़ाई बन चुका है। नागरिकों, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों, युवाओं और राजनीतिक दलों की बढ़ती भागीदारी ने प्रशासन के खिलाफ जनविरोध को और तीखा कर दिया है।

नगर निगम द्वारा जारी बेदखली नोटिस से दुर्गानगर व चौक क्षेत्र के 113 परिवारों में भारी डर और आक्रोश है। तीन पीढ़ियों से बसे परिवारों ने आरोप लगाया कि उन्हें राजीव आश्रय योजना में पट्टा देकर कर वसूलने के बाद अब अचानक अवैध घोषित कर दिया गया, जो न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। लोगों का कहना है कि निगम ने न तो पारदर्शिता दिखाई और न ही पुनर्वास की कोई व्यवस्था।
पिछली तोड़फोड़ कार्रवाइयों—रामनगर, श्यामनगर और चिंगराजपारा—के अनुभवों ने शहर भर में असुरक्षा बढ़ा दी है। कई परिवार अभी तक पुनर्वास को तरस रहे हैं, जिससे मोपका, बहतराई, खमतराई और मंगला जैसे क्षेत्रों में भी भय का माहौल है।
धरने में महिलाओं की भागीदारी सबसे प्रभावशाली रही। सैकड़ों माताएँ और बेटियाँ “घर नहीं टूटने देंगे”, “बिना पुनर्वास बेदखली नहीं” जैसे नारों के साथ आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं।
इधर छत्तीसगढ़ प्रखर पत्रकार महासंघ ने भी धरना स्थल पहुँचकर आंदोलन को नैतिक समर्थन दिया। प्रदेश अध्यक्ष विनय मिश्रा सहित कई पदाधिकारियों की उपस्थिति ने आंदोलन को और मजबूती प्रदान की।
आंदोलनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक बेदखली पर रोक, पट्टा की वैधता और पुनर्वास की गारंटी नहीं मिलती, वह संघर्ष और तेज होगा।






