

✍️ भागीरथी यादव
उत्तर प्रदेश में एक बार फिर कानून का डंडा इतनी मजबूती से चला कि अपराधियों के हौसले जमीन पर आ गिरे। रात के अंधेरे से लेकर सुबह की पहली किरण तक चली पुलिस कार्रवाई ने साफ संदेश दे दिया—अब अपराध करके बच निकलना आसान नहीं, बल्कि लगभग नामुमकिन है।

प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ों में कई कुख्यात अपराधी या तो घायल होकर धराशायी हो गए या हमेशा के लिए खामोश कर दिए गए। कहीं 50 हजार का इनामी बदमाश पुलिस की गोली से लंगड़ाता नजर आया, तो कहीं 20 हजार का एटीएम ठग एनकाउंटर में घायल होकर अस्पताल पहुंचा।

मेरठ में पुलिस ने एक शातिर हिस्ट्रीशीटर को मुठभेड़ में ढेर कर दिया, जो लंबे समय से कानून व्यवस्था के लिए सिरदर्द बना हुआ था। प्रतापगढ़ में पशु तस्करी के नेटवर्क पर करारा प्रहार करते हुए पुलिस ने एक तस्कर को गोली लगने के बाद गिरफ्तार किया। वहीं सुल्तानपुर में हत्या के आरोपियों को घेराबंदी कर दबोचते हुए पुलिस ने अपनी रणनीतिक मजबूती का प्रदर्शन किया।

लगातार हो रही इन कार्रवाइयों ने एक बार फिर यूपी पुलिस के ‘एक्शन मोड’ को उजागर कर दिया है। साफ है कि प्रदेश में अपराध के लिए कोई सहनशीलता नहीं है और कानून से टकराने वालों को अब सीधा जवाब मिल रहा है।
यह अभियान सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि अपराधियों के लिए एक सख्त चेतावनी है—अब या तो सुधर जाओ, या फिर कानून की गिरफ्त में आने के लिए तै
यार रहो।








