
✍️ रिपोर्ट: ज्ञान शंकर तिवारी, पाली
पाली विकासखंड के धान खरीदी उपार्जन केंद्र पोटापानी में इन दिनों अव्यवस्था और किसानों की परेशानी थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला उस वक्त सामने आया, जब एक महिला किसान की पांच कट्टी धान को प्रबंधन ने सरकारी नियम-कायदों का हवाला देते हुए खरीदने से इंकार कर दिया।

धान लौटाए जाने की बात सुनते ही महिला किसान भावुक हो गई और फफक-फफक कर रो पड़ी। रोते हुए उसने अपने परिजनों से कहा कि अब धान नहीं बिकेगा और उसे ट्रैक्टर में भरकर घर वापस ले जाना पड़ेगा। यह मार्मिक दृश्य वहां मौजूद अन्य किसानों के लिए भी बेहद पीड़ादायक रहा।

इसी दौरान मौके पर मौजूद एक यूट्यूबर ने महिला की पीड़ा को कैमरे में कैद कर वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। वीडियो वायरल होते ही लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। सोशल मीडिया पर जहां कुछ लोगों ने यह टिप्पणी की कि “अगर हजार रुपये दे दिए होते तो धान खराब नहीं निकलती”, वहीं कई लोगों ने सीधे तौर पर प्रबंधन और प्रशासन पर सवाल खड़े करते हुए किसानों के साथ अन्याय का आरोप लगाया।
गौरतलब है कि धान खरीदी शुरू होने से पहले ही उपार्जन केंद्र के ऑपरेटर हड़ताल पर चले गए थे, जिससे खरीदी व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई थी। किसानों को राहत देने के लिए प्रशासन ने आनन-फानन में वैकल्पिक ऑपरेटरों की नियुक्ति की थी। करीब एक सप्ताह बाद पुराने ऑपरेटर अपनी मांगों और सुरक्षा को लेकर हड़ताल खत्म कर वापस लौट आए।
इसके बाद से ही किसानों ने आरोप लगाना शुरू किया कि उनके धान के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ की जा रही है। किसानों का कहना है कि पहले कभी नियमों को लेकर इतनी सख्ती नहीं बरती गई। उनका आरोप है कि ऑपरेटरों की मांगें पूरी न होने की खीझ किसानों पर निकाली जा रही है, जिससे सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है।
किसानों का कहना है कि कभी धान में नमी, तो कभी गुणवत्ता का बहाना बनाकर खरीदी से इंकार कर दिया जाता है। इससे उन्हें न केवल आर्थिक नुकसान, बल्कि समय और संसाधनों की भी भारी क्षति उठानी पड़ रही है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और संवेदनशील बनाया जाए, ताकि किसी और किसान को इस तरह अपमान और पीड़ा का सामना न करना पड़े।






