
रायपुर।
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी मंगलवार देर शाम की गई। ईडी ने बताया कि सौम्या चौरसिया को बुधवार को विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
ईडी के अधिवक्ता सौरभ कुमार पांडे ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि सौम्या चौरसिया पहले से ही कोयला लेवी घोटाले में आरोपी हैं। उल्लेखनीय है कि उन्हें 2022 में कोयला लेवी घोटाले में गिरफ्तार किया गया था और इस साल मई में उच्चतम न्यायालय से अंतरिम जमानत मिलने के बाद वे जेल से बाहर आई थीं।

शराब घोटाले की कड़ी में नई गिरफ्तारी
प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में अंजाम दिया गया। इस घोटाले से राज्य सरकार के खजाने को 2,500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ, जबकि शराब सिंडिकेट से जुड़े लोगों ने अवैध रूप से भारी मुनाफा कमाया।
इस मामले में ईडी पहले ही कई बड़ी गिरफ्तारियां कर चुकी है।
15 जनवरी को कांग्रेस विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को गिरफ्तार किया गया।
18 जुलाई को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को भी ईडी ने हिरासत में लिया।
ईडी के गंभीर आरोप ईडी ने आरोप लगाया है कि
कवासी लखमा अपराध की कमाई के मुख्य लाभार्थी थे और आबकारी मंत्री रहते हुए उन्हें बड़ी मात्रा में नकद राशि मिली।
चैतन्य बघेल शराब घोटाले के सिंडिकेट के कथित मुखिया थे और उन्होंने लगभग 1,000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का व्यक्तिगत रूप से प्रबंधन किया।
CMO तक पहुंचा मामला
सौम्या चौरसिया की गिरफ्तारी के बाद यह मामला सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचता नजर आ रहा है। वे भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री रहते हुए CMO में उप सचिव के पद पर कार्यरत थीं। उनकी भूमिका को लेकर अब जांच और तेज होने के संकेत हैं।
ईडी की ताजा कार्रवाई ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर हलचल मचा दी है। आने वाले दिनों में इस घोटाले में और बड़े नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।






