
सुशील जायसवाल | सिरमिना (कोरबा)
कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के दुरस्त और सरहदी वनांचल क्षेत्रों में अब शिक्षा की तस्वीर बदलती नजर आ रही है। जिला मुख्यालय से करीब 120 किलोमीटर दूर स्थित इन ग्रामीण अंचलों में प्राथमिक शिक्षा को नई दिशा देने का कार्य नवपदस्थ शिक्षकों द्वारा किया जा रहा है।
युक्तियुक्तकरण 2025 के तहत संकुल केंद्र सिमगा के विभिन्न विद्यालयों में पदस्थ हुए शिक्षकों ने सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचारी शिक्षण पद्धतियों से शिक्षा का अलख जगा दिया है। खास तौर पर प्राथमिक शाला सरनापारा में पदस्थ सहायक शिक्षक तेजराम चंद्रा द्वारा किए जा रहे प्रयास क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं।

तेजराम चंद्रा ने पालकों और ग्रामीणों को शिक्षा से जोड़ते हुए शिक्षक–पालक–विद्यार्थी के बीच सतत संपर्क स्थापित किया। बच्चों को स्वयं से सीखने के लिए प्रेरित करने, रुचिकर गतिविधियों के माध्यम से अध्यापन को प्रभावी बनाने और पढ़ाई के प्रति सकारात्मक माहौल तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
इन प्रयासों का असर यह हुआ कि जहां कभी बच्चों की उपस्थिति चिंता का विषय थी, वहीं अब विद्यालय में शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की जा रही है। छोटे-छोटे बच्चों में सीखने की ललक और आत्मविश्वास बढ़ा है, जिससे उनका सर्वांगीण विकास संभव हो रहा है।
दुरस्त वनांचल क्षेत्र में शिक्षा के प्रति यह जागरूकता न केवल भविष्य की मजबूत नींव रख रही है, बल्कि यह साबित कर रही है कि यदि शिक्षक में समर्पण और नवाचार हो, तो सबसे दूरस्थ इलाकों में भी शिक्षा की रोशनी पहुंचाई जा सकती है।






