
दमोह।
मध्य प्रदेश के दमोह जिले से सामने आए एक सनसनीखेज आत्महत्या मामले ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। हटा थाना क्षेत्र के गढ़िया गांव में रहने वाले 18 वर्षीय दलित युवक रीतेश बंसल ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौत से पहले उसने एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें उसने पुलिस पर झूठी शिकायत के आधार पर डराने-धमकाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। वीडियो सामने आते ही प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
रीतेश की मौत के बाद जहां पुलिस कटघरे में खड़ी नजर आ रही है, वहीं मृतक के परिजन न्याय की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए। परिजनों का आरोप है कि पुलिस की धमकियों और सामाजिक बदनामी के डर ने उनके बेटे को मौत के मुंह में धकेल दिया।
एक मामूली घटना, और टूट गया पूरा भविष्य
परिजनों और मृतक के दोस्त के अनुसार, दो दिन पहले रीतेश अपने दोस्त श्रीराम के साथ हटा गया था। लौटते समय हारट के पास स्कूल से लौट रही दो छात्राओं से बाइक हल्की टकरा गई। दोनों युवकों ने तुरंत माफी मांगी और आसपास मौजूद लोगों ने भी समझाइश दी। मामला वहीं शांत हो सकता था, लेकिन छात्राओं ने डायल 112 पर कॉल कर पुलिस बुला ली।
पुलिस के पहुंचने पर रीतेश का दोस्त मौके से चला गया, जबकि रीतेश वहीं रुक गया। कुछ देर बाद वह घर लौट आया, लेकिन परिवार का कहना है कि उसी दिन पुलिसकर्मी उसके घर पहुंचे और उसे जेल भेजने, घर पर बुलडोजर चलवाने जैसी धमकियां दी गईं। इस घटनाक्रम से रीतेश बुरी तरह डर गया।

डर, बदनामी और बेबसी… और फिर मौत
परिजनों का कहना है कि रीतेश को अपने घर के उजड़ने और समाज में बदनामी का डर सताने लगा था। इसी मानसिक दबाव में उसने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठा लिया। उसकी मौत से पहले रिकॉर्ड किया गया वीडियो इस बात की गवाही देता है, जिसमें उसने साफ तौर पर पुलिस की धमकी और झूठी शिकायत को अपनी मौत की वजह बताया है।
दो दिन तक कार्रवाई नहीं, फूटा परिजनों का गुस्सा
रीतेश का अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन दो दिन बीत जाने के बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आक्रोशित परिजनों ने हटा थाना के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। सड़क जाम करने की भी कोशिश की गई, हालांकि बाद में पुलिस की समझाइश के बाद स्थिति शांत हुई।
जांच के घेरे में पुलिस
इस मामले में पुलिस अब बचाव की मुद्रा में नजर आ रही है। जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजीत भदौरिया ने बताया कि परिजनों की शिकायत पर जांच शुरू कर दी गई है। वायरल हो रहे वीडियो की सत्यता की भी पुष्टि कराई जा रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि दो दिन पहले डायल 112 पर कॉल आया था और पुलिस मौके पर पहुंची थी, लेकिन युवक ने आत्महत्या जैसा कदम क्यों उठाया, इसकी गहन जांच की जा रही है।
एडिशनल एसपी ने कहा कि यह भी जांच की जा रही है कि रीतेश के घर कौन-कौन से पुलिसकर्मी गए थे और उनके बीच क्या बातचीत हुई थी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
न्याय की मांग, सिस्टम पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली, संवेदनशीलता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक युवा जीवन का यूं खत्म हो जाना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है। अब सबकी निगाहें जांच पर टिकी हैं—क्या रीतेश को न्याय मिलेगा, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?





