
✍️ भागीरथी यादव
कोरबा, 24 दिसंबर।
कोरबा जिले को झकझोर देने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता एवं जनपद पंचायत बिंझरा के सदस्य अक्षय गर्ग की जघन्य हत्या के मामले में पुलिस ने ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए महज 24 घंटे के भीतर साजिशकर्ता से लेकर हत्यारों तक सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस सनसनीखेज हत्याकांड के खुलासे से न केवल पुलिस की कार्यकुशलता सामने आई है, बल्कि जिले में फैली दहशत पर भी अंकुश लगा है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए आईजी डॉ. संजीव शुक्ला स्वयं कटघोरा पहुंचे, जबकि पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने कटघोरा थाना अंतर्गत जटगा पुलिस सहायता केंद्र में कैंप लगाकर पूरे ऑपरेशन की कमान संभाली। कप्तान के नेतृत्व में गठित तकनीकी व विशेष टीमों ने लगातार काम करते हुए कुछ ही घंटों में हत्या की साजिश की परतें खोल दीं।
ऐसे रची गई हत्या की साजिश
पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या की साजिश एक दिन पहले ही रच ली गई थी, लेकिन मौके के अभाव में अगले दिन वारदात को अंजाम दिया गया। घटना के दिन गुलशन दास बाइक से आगे-आगे चलकर अक्षय गर्ग की गतिविधियों की रेकी करता रहा। इसके बाद मौके पर पहुंचे मुख्य साजिशकर्ता मुस्ताक अहमद ने चाकू से हमला किया, जबकि विश्वजीत ओग्रे ने कुल्हाड़ी से जानलेवा वार कर अक्षय गर्ग की हत्या कर दी।
आरोपी जिस चार पहिया वाहन (अर्बन क्रूज़र, CG 12 BF 4345) से घटनास्थल तक पहुंचे थे, उसे पुलिस ने जब्त कर लिया है। साथ ही हत्या में प्रयुक्त चाकू, लोहे की टंगिया, खून से सने कपड़े, मोबाइल फोन और अन्य अहम साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं।
हत्या की वजह: व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक रंजिश
पुलिस के अनुसार इस हत्याकांड की जड़ में व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक रंजिश थी। मुख्य आरोपी मुस्ताक अहमद ठेकेदारी के क्षेत्र में काम करना चाहता था, लेकिन अक्षय गर्ग के प्रभाव के कारण उसे क्षेत्र में अवसर नहीं मिल पा रहा था।
पूर्व जनपद चुनाव में दोनों के बीच सीधा मुकाबला हुआ था। चुनाव में अक्षय गर्ग की जीत के बाद उनका सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव बढ़ा, जबकि मुस्ताक का दबदबा कमजोर हुआ—यही बात धीरे-धीरे घातक रंजिश में बदल गई।
गिरफ्तार आरोपी
मिर्जा मुस्ताक अहमद (27 वर्ष) – निवासी ग्राम मलदा, मुख्य साजिशकर्ता
विश्वजीत ओग्रे (21 वर्ष) – निवासी ग्राम सिंघिया कोरबी
गुलशन दास (26 वर्ष) – निवासी ग्राम मलदा
एक 15 वर्षीय नाबालिग – विधि से संघर्षरत बालक
सभी वयस्क आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है, जबकि नाबालिग को बाल न्याय अधिनियम के तहत विधिसम्मत कार्रवाई में लिया गया है।
इस पूरे अभियान में पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नितिश ठाकुर, एसडीओपी, कटघोरा थाना पुलिस और जिला पुलिस टीम की भूमिका को सराहनीय बताया जा रहा है।
कोरबा पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं और अपराधी कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों, वे न्याय से बच नहीं सकते।






