
✍️ भागीरथी यादव
विकास के नाम पर भ्रष्टाचार, लापरवाही और मिलीभगत का आरोप
कोरबा/पाली।
विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हुए विकासखंड पाली के अंतर्गत ग्राम पंचायत मादन से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां मुख्य मार्ग से बस्ती की ओर बन रही सीसी रोड ग्रामीणों के लिए सुविधा बनने से पहले ही भ्रष्टाचार और लापरवाही की तस्वीर बनती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य के शुरुआती चरण में ही सड़क की हालत देखकर इसके टिकाऊ होने पर संदेह गहराने लगा है।

जिस सड़क से बरसात में राहत, सुगम आवागमन और गांव के विकास की उम्मीद थी, वही सड़क अब घटिया निर्माण की मिसाल बनकर पंचायत से लेकर प्रशासन तक की कार्यप्रणाली को उजागर कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। न तो सड़क की मोटाई का ध्यान रखा गया, न ही बेस तैयार करने और क्योरिंग जैसे अनिवार्य नियमों का पालन किया जा रहा है। मिलर मशीन से जल्दबाजी में कंक्रीट डालकर काम निपटाया जा रहा है, जिससे सड़क की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मानकों को दरकिनार कर हो रहा निर्माण
स्थानीय लोगों के अनुसार सीमेंट, गिट्टी और रेत का अनुपात नियमों के अनुरूप नहीं रखा जा रहा। ढलाई से पहले न तो मजबूत बेस बनाया गया और न ही बाद में उचित क्योरिंग की व्यवस्था की गई। नतीजा यह है कि सड़क की ऊपरी परत निर्माण के दौरान ही कमजोर दिखाई देने लगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि गुणवत्ता जांच के बिना ही काम को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका और गहरी हो गई है।
मशीनों से काम, ग्रामीणों का रोजगार छीना
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जहां हाथ से काम कराकर स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिल सकता था, वहां मशीनों का इस्तेमाल कर दिया गया। मनरेगा और रोजगारपरक योजनाओं की भावना के विपरीत यह कार्यवाही ग्रामीण मजदूरों की रोजी-रोटी पर सीधा हमला है। लोगों का कहना है कि ऐसा विकास, जो रोजगार छीन ले, वह विकास नहीं बल्कि शोषण है।
बनी नहीं सड़क, तोड़ने की तैयारी
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सड़क पूरी तरह बनने से पहले ही पाइपलाइन बिछाने के नाम पर कोर कटिंग की तैयारी शुरू कर दी गई है। यानी सड़क बनते ही उसे तोड़ने की योजना तैयार है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि योजना निर्माण और क्रियान्वयन में भारी लापरवाही बरती गई है या फिर यह सब पहले से तय रणनीति का हिस्सा है। ग्रामीणों को आशंका है कि कुछ ही महीनों में यह सड़क गड्ढों में तब्दील हो जाएगी और फिर मरम्मत के नाम पर दोबारा सरकारी राशि खर्च की जाएगी।
शिकायतों के बावजूद प्रशासन मौन
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में हो रही अनियमितताओं की शिकायतें कई बार संबंधित अधिकारियों से की गईं, लेकिन न तो काम रोका गया और न ही कोई जांच शुरू हुई। अधिकारियों की चुप्पी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला बड़े भ्रष्टाचार का उदाहरण बन जाएगा।
ठेकेदार की राजनीतिक पहुंच की चर्चा
ग्रामीणों के मुताबिक संबंधित ठेकेदार खुलेआम विधायक और मंत्री तक पहुंच होने की धौंस देता है। शिकायत करने पर ठेकेदार बेखौफ नजर आता है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है। बताया जा रहा है कि इससे पहले तेंदूपारा क्षेत्र में इसी ठेकेदार द्वारा बनाई गई सीसी रोड के उखड़ने की शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन तब भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सरपंच-सचिव की भूमिका संदेह के घेरे में
निर्माण की निगरानी की जिम्मेदारी जिन सरपंच और सचिव पर है, उनके कार्यस्थल पर न पहुंचने के आरोप भी लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गुणवत्ता की बजाय कथित कमीशन को प्राथमिकता दी जा रही है, इसी कारण घटिया सामग्री और अधूरी क्योरिंग खुलेआम हो रही है।
स्वतंत्र जांच और कार्रवाई की मांग
ग्राम पंचायत मादन के ग्रामीणों ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही दोषी ठेकेदार, संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का निर्माण मानकों के अनुरूप दोबारा कराया जाए, ताकि आने वाले वर्षों तक गांव को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।
ग्रामीणों की यह आवाज अब केवल एक गांव की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर सीधा सवाल है, जो विकास के नाम पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब जागते हैं और इस मामले में कब ठोस कार्रवाई होती है






