
सुशील जायसवाल
कोरबी/चोटिया।
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मानव–हाथी द्वंद्व की गंभीर समस्या के समाधान को लेकर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन हाथी नियंत्रण केंद्र, चोटिया (वन परिक्षेत्र केंदई) में किया गया। कार्यशाला का मूल उद्देश्य मानव और हाथियों के बीच बढ़ते टकराव को रोकते हुए सुरक्षित सहअस्तित्व सुनिश्चित करना रहा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री के. के. बिसेन, सदस्य सी.पी.ई.एम.सी. (प्रोजेक्ट टाइगर एवं हाथी डिवीजन), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार रहे। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता वनमंडल अधिकारी कुमार निशांत ने की।

हाथियों की सुरक्षा और मानव जीवन बचाने पर जोर
कार्यशाला में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि मानव–हाथी द्वंद्व प्रबंधन का लक्ष्य केवल नुकसान की भरपाई नहीं, बल्कि जनहानि शून्य और हाथी हानि शून्य की दिशा में ठोस एवं व्यावहारिक कदम उठाना है। हाथियों के पारंपरिक विचरण मार्गों, भोजन व जल स्रोतों की सुरक्षा, तथा मानवीय गतिविधियों के संतुलन पर विशेष चर्चा की गई।

प्रारंभिक चेतावनी तंत्र और त्वरित प्रतिक्रिया दल पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने वाले प्रारंभिक चेतावनी तंत्र, त्वरित प्रतिक्रिया दल की भूमिका, ग्रामीणों की समय पर सूचना प्रणाली तथा जन-जागरूकता अभियानों को मजबूत करने पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। अधिकारियों ने कहा कि विभाग और ग्रामीणों के बीच समन्वय ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।
अधिकारी, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण रहे उपस्थित
कार्यशाला में सहायक वन संरक्षक सुश्री यामिनी पोर्ते, वन परिक्षेत्र अधिकारी केंदई अभिषेक कुमार दुबे, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, हाथी मित्र दल, एवं बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।
इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही, जिनमें —
भारत सिंह सिदार, जनपद सदस्य
लाल बहादुर, सरपंच, ग्राम पंचायत लाद
जवाहर सिंह, सरपंच, ग्राम पंचायत परला
श्रीमती प्यारो बाई रायसिंह, सरपंच, ग्राम पंचायत चोटिया
सहित अन्य सरपंच प्रतिनिधि शामिल रहे।
समन्वित प्रयासों का आह्वान
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी सहभागियों से आह्वान किया गया कि वन विभाग, प्रशासन, जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण मिलकर सामूहिक प्रयास करें, ताकि मानव और हाथी दोनों सुरक्षित रह सकें और क्षेत्र में स्थायी शांति एवं संतुलन बना रहे।






