
✍️ भागीरथी यादव
एमसीबी। जिला एमसीबी में सामने आया पीएमजीएसवाई सड़क घोटाला अब महज एक निर्माण में हुई गड़बड़ी नहीं रहा, बल्कि यह उस व्यवस्था का आईना बन गया है, जिसमें विकास से पहले भ्रष्टाचार की परत चढ़ा दी जाती है। छत्तीसगढ़ में सुशासन के दावों के बीच यह मामला जमीनी हकीकत को बेनकाब करता है, जहां जनता की मेहनत की कमाई विकास के नाम पर खुलेआम लूटी जा रही है।

खड़गवां ब्लॉक के ग्राम पंचायत कदरेवा, भूकभूकी और बरबसपुर में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत कराई गई सड़क मरम्मत ने शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस सड़क को वर्षों तक ग्रामीणों की सेवा करनी थी, वह निर्माण के अगले ही दिन उखड़ने लगी। ग्रामीणों ने अपनी उंगलियों से डामर निकालकर घटिया गुणवत्ता की सच्चाई उजागर कर दी।

स्थल पर की गई पड़ताल में सामने आया कि निर्माण कार्य में न तो मानक गुणवत्ता का डामर इस्तेमाल किया गया और न ही तय मोटाई का पालन हुआ। सड़क की मोटाई महज 4 से 5 मिलीमीटर पाई गई। मिट्टी के ऊपर सीधे डामर डाल दिया गया, बिना बेस तैयार किए और बिना रोलर से उचित कम्पैक्शन किए। यह निर्माण नहीं, बल्कि सरकारी धन का सुनियोजित दुरुपयोग प्रतीत होता है।

जब ग्रामीणों ने इस घोटाले का विरोध किया, तो ठेकेदार से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर धमकी देते हुए कहा कि उनकी “ऊपर तक सेटिंग” है और उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यह बयान केवल ठेकेदार की दबंगई नहीं, बल्कि उस पूरे तंत्र पर सवाल है, जो भ्रष्टाचार को संरक्षण देता है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने गंभीर आरोप और सबूत सामने आने के बावजूद प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। उनकी यह खामोशी कई सवाल खड़े करती है—क्या यह लापरवाही है या फिर मिलीभगत?
अब जनता पूछ रही है कि क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी कागजों में दबाकर सुशासन के खोखले दावों से ढक दिया जाएगा। एमसीबी की यह सड़क नहीं, बल्कि सिस्टम की दरार है, जिसे अब अनदेखा करना मुश्किल हो गया है।






