
✍️ भागीरथी यादव
मनेन्द्रगढ़ (MCB)। छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) में देशी शराब की गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश है। शहर के शराब प्रेमियों ने वर्तमान व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि सरकारी दुकानों में मिलने वाली शराब अब पहले जैसी नहीं रही। उपभोक्ताओं का दावा है कि शराब में मिलावट की जा रही है, जिसके चलते अब वे ‘ठेका प्रणाली’ को वापस लाने की मांग कर रहे हैं।
“दो क्वार्टर में भी नहीं मिल रहा पहले जैसा असर”
स्थानीय ऑटो चालक श्रीनिवास सेन और उनके साथियों ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि वे दिनभर की थकान मिटाने के लिए सप्ताह में एक-दो बार शराब का सेवन करते हैं। उनके अनुसार, पूर्ववर्ती सरकार के समय शराब न केवल सस्ती थी, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी अच्छी थी।
“पहले एक क्वार्टर में ही संतोष मिल जाता था, लेकिन अब स्थिति यह है कि दो क्वार्टर पीने के बाद भी वैसा नशा या असर महसूस नहीं होता। इससे साफ पता चलता है कि शराब में मिलावट की जा रही है।” — स्थानीय उपभोक्ता
पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश का रुख कर रहे लोग
गुणवत्ता में गिरावट का असर अब स्थानीय राजस्व पर भी पड़ता दिख रहा है। उपभोक्ताओं ने बताया कि बेहतर और शुद्ध शराब की तलाश में उन्हें पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के राजनगर जाना पड़ रहा है। इससे न केवल उनका आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, बल्कि समय की भी बर्बादी हो रही है। लोगों का तर्क है कि यदि स्थानीय स्तर पर गुणवत्ता में सुधार हो, तो मध्य प्रदेश से होने वाली शराब की अवैध आवक पर भी लगाम लगेगी।
आबकारी विभाग पर चुप्पी साधने का आरोप
शराब प्रेमियों का कहना है कि गुणवत्ता में आ रही इस गिरावट और मिलावट की शिकायतों को मीडिया के माध्यम से कई बार जिला आबकारी विभाग तक पहुँचाया गया है। इसके बावजूद, विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई या लैब टेस्टिंग जैसी पहल नहीं की गई है। प्रशासन की इस कथित अनदेखी से स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
प्रमुख मांगें:
ठेका प्रणाली की वापसी: उपभोक्ताओं का मानना है कि निजी ठेकेदारों के हाथ में कमान होने से प्रतिस्पर्धा रहती है और गुणवत्ता पर जवाबदेही तय होती है।
निष्पक्ष जांच: वर्तमान स्टॉक की लैब में जांच कराई जाए ताकि मिलावट का सच सामने आ सके।
पारदर्शिता: बिक्री और स्टॉक के प्रबंधन में पारदर्शिता लाई जाए ताकि उपभोक्ताओं को मानक उत्पाद मिल सके।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन शिकायतों पर क्या रुख अपनाता है और क्या उपभोक्ताओं को उनकी मांग के अनुरूप शुद्धता का आश्वासन मिलता है।







