
बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से नक्सल मोर्चे पर एक बड़ी और निर्णायक सफलता सामने आई है। जिले में कुल 52 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली पुना मार्गेम योजना के तहत समाज की मुख्यधारा से जुड़ेंगे।

सुरक्षाबलों के सामने छोड़ी हिंसा की राह
आत्मसमर्पित नक्सलियों ने बीजापुर एसपी और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष नक्सली विचारधारा और हिंसक गतिविधियों से पूरी तरह दूरी बनाने की घोषणा की। खास बात यह है कि आत्मसमर्पण करने वालों में बड़े कैडर के माओवादी भी शामिल हैं, जिन पर कुल मिलाकर 1 करोड़ 45 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
‘टारगेट 2026’ की ओर बड़ा कदम
इस सामूहिक आत्मसमर्पण को टारगेट 2026 से पहले नक्सल संगठन के कमजोर पड़ने का संकेत माना जा रहा है। लगातार चल रहे एंटी नक्सल ऑपरेशन और विकास आधारित योजनाओं से नक्सली संगठन सिमटता नजर आ रहा है।

एसपी जितेंद्र यादव ने गिनाई सफलता की वजह
बीजापुर एसपी जितेंद्र यादव ने बताया कि सीआरपीएफ और जिला पुलिस के सतत प्रयास, प्रभावी एंटी नक्सल रणनीति और सरकार की पुनर्वास योजनाओं के चलते यह बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का पुनर्वास सरकार की नीति के तहत किया जाएगा, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में मजबूत संकेत
एक साथ 52 नक्सलियों का आत्मसमर्पण न केवल सुरक्षाबलों की रणनीतिक जीत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अब नक्सली हिंसा के बजाय विकास और शांति का रास्ता चुनने लगे हैं। यह घटना नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में एक अहम मील का पत्थर मानी जा रही है।






