
डबल जियो-टैगिंग ने खोली भ्रष्टाचार की परतें, अधिकारी चुप
बिलासपुर/कोटा — कोटा जनपद के ग्राम खैरा में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। लाखों की आवास राशि का उपयोग पक्का मकान बनाने के बजाय सिर्फ शौचालय और छोटे कमरों के निर्माण में कर दिया गया। तीन लाभार्थियों को स्वीकृत आवास कागज़ों में पूर्ण दिखाए गए, जबकि जमीनी हकीकत अधूरी और मानकों से परे निकली।
डबल जियो-टैगिंग ने बढ़ाया संदेह
एक ही आवास पर दो-दो जियो-टैग अपलोड हुए—जो साफ संकेत है कि या तो निरीक्षण बिना स्थल पर पहुँचे कर दिया गया, या तकनीकी स्टाफ की मिलीभगत से जियो-टैगिंग में हेरफेर की गई।

लाभार्थी की स्वीकारोक्ति ने बढ़ाई गंभीरता
कान्हा जायसवाल ने स्वीकार किया कि पूरी राशि उन्होंने शौचालय और एक छोटे कमरे में खर्च कर दी। यह योजना के नियमों और स्वीकृत निर्माण मानकों का सीधा उल्लंघन है।
तकनीकी फेक का बचाव सवालों के घेरे में
तकनीकी प्रभारी धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा—“मेरी अनुमति के बिना जियो-टैगिंग संभव नहीं।”
फिर जियो-टैग किसने किया? निरीक्षण किसने पास किया? यह बयान स्वयं उनके खिलाफ गंभीर संदेह खड़ा करता है।
जनपद की चुप्पी और बढ़ा रही शंका
मामला उजागर होने के बावजूद न रिपोर्ट, न नोटिस, न प्रारंभिक कार्रवाई—कुछ भी नहीं। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सामान्य गलती नहीं, बल्कि “बड़ा आर्थिक खेल” है।
ग्रामीणों की मांग
उच्च स्तरीय जांच
दोषियों की पहचान व निलंबन
गलत भुगतान की वसूली
पूरी पंचायत के आवासों की समीक्षा
अब सबसे बड़ा सवाल
क्या जिला प्रशासन कार्रवाई करेगा, या यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?
जनता की निगाहें अब प्रशासनिक कदमों पर टिकी हैं।







