
✍️ भागीरथी यादव
नई दिल्ली/पटना। भारत निर्वाचन आयोग ने सोमवार को बिहार की 243 विधानसभा सीटों (38 अनुसूचित जाति, 2 अनुसूचित जनजाति आरक्षित) के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी। राज्य में दो चरणों में मतदान होगा — पहले चरण में 121 सीटों पर 6 नवंबर को और दूसरे चरण में 122 सीटों पर 11 नवंबर को मतदान कराया जाएगा। मतगणना 14 नवंबर को होगी।
कुल 7.43 करोड़ मतदाताओं में 3.92 करोड़ पुरुष और 3.50 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। इस बार का चुनाव राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और महागठबंधन के बीच कड़ी टक्कर वाला माना जा रहा है। वहीं जन सुराज और एआईएमआईएम जैसे दल समीकरण को जटिल बना सकते हैं।
महिला मतदाता फिर होंगे निर्णायक
बिहार में महिला मतदाता लगातार अधिक मतदान कर रही हैं और इस बार भी ‘किंगमेकर’ की भूमिका में दिख रही हैं। एनडीए महिला केंद्रित योजनाओं के सहारे उन्हें साधने की कोशिश में है, जबकि महागठबंधन रोजगार और सामाजिक न्याय के वादों पर फोकस कर रहा है।
गठबंधनों की रणनीति और मुद्दे
एनडीए नीतीश कुमार के सुशासन, पीएम नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और कल्याणकारी योजनाओं पर चुनाव लड़ रहा है। वहीं महागठबंधन बेरोजगारी, शिक्षा और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों को प्रमुखता दे रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सीमांचल और शहरी इलाकों में त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना है, जहां जन सुराज और एआईएमआईएम दोनों गठबंधनों की गणित बिगाड़ सकते हैं।
निष्कर्ष
जाति, विकास और नेतृत्व के मुद्दों पर टिका यह चुनाव न केवल बिहार की, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय करेगा।








