
✍️ भागीरथी यादव
पटना, 13 नवंबर 2025।
बिहार विधानसभा चुनाव का शोर अब थम चुका है। दो चरणों में मतदान पूरा हो गया है और अब पूरा बिहार 14 नवंबर को होने वाली मतगणना का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। इसी दिन तय होगा कि सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठेगा — एनडीए या महागठबंधन।
चुनाव आयोग ने इस बार का चुनाव कार्यक्रम 6 अक्तूबर को घोषित किया था। पहले चरण का मतदान 6 नवंबर और दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को संपन्न हुआ। 9 नवंबर को चुनाव प्रचार का शोर थमने के साथ ही राज्य की सियासत अब पूरी तरह “मौन” मोड में है।
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🗳️ चुनाव प्रचार में उड़ा आसमान, हेली प्रचार पर 72 करोड़ का खर्च
इस बार का बिहार चुनाव न केवल ज़मीन पर, बल्कि आसमान में भी लड़ा गया। रिपोर्टों के मुताबिक राजनीतिक दलों ने हेलीकॉप्टर और चौपर से प्रचार करने में 72 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए।
16 अक्टूबर के बाद से पटना एयरपोर्ट पर उड़ानों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई। प्रचार के चरम पर प्रतिदिन औसतन 25 हेलीकॉप्टर आसमान में उड़ते रहे।
अब तक 600 से अधिक हेलीकॉप्टर और 40 चौपर उड़ान भर चुके हैं, जबकि लैंडिंग और डिपार्चर मिलाकर करीब 1,200 से अधिक हवाई मूवमेंट दर्ज किए गए।
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💸 प्रति हेलीकॉप्टर रोजाना 12 लाख रुपये का खर्च
जानकारी के अनुसार, एक हेलीकॉप्टर पर प्रतिदिन जीएसटी समेत करीब 12 लाख रुपये खर्च हुए। प्रत्येक हेलीकॉप्टर ने रोजाना औसतन 4 से 5 घंटे उड़ान भरी। कुल मिलाकर 3,000 घंटे से अधिक की हवाई उड़ानें बिहार की सियासी फिज़ा में गूंजती रहीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार के चुनाव में हेलीकॉप्टर प्रचार ने बिहार की राजनीति को नया आयाम दिया है। हालांकि, 14 नवंबर को नतीजे आने के बाद ही तय होगा कि इस भारी भरकम खर्च और हवाई रणनीति का फायदा आखिर किसके पाले में गया।








