
✍️ भागीरथी यादव
बीजापुर। कभी माओवाद की छाया में सिमटा रहने वाला भैरमगढ़ ब्लॉक अब विकास की नई दिशा में बढ़ रहा है। इन्द्रावती नदी पार बसे सात गांवों — उसपरी, बेलनार, सतवा, कोसलनार, ताड़पोट, उतला और इतामपार — में पहली बार प्रशासन ने एक साथ मेगा हेल्थ कैंप का आयोजन कर इतिहास रच दिया।
छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति 2025 के तहत यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की मिसाल बनी है, बल्कि माओवाद प्रभावित इलाकों में विश्वास और विकास का नया अध्याय भी खोल रही है। बड़ी संख्या में माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद अब इन गांवों में प्रशासनिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं।

मेगा हेल्थ कैंप में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने कुल 989 ग्रामीणों की जांच की। इसमें सामान्य जांच के 777, रक्तचाप 371, मुख कैंसर 344, ब्रेस्ट कैंसर 112, नेत्र जांच 199, दंत जांच 154, टीकाकरण 14, संपूर्ण टीकाकरण 8, मलेरिया 156, क्षय रोग 7 तथा उल्टी-दस्त के 24 प्रकरण शामिल रहे। इनमें 54 वरिष्ठ नागरिकों का भी परीक्षण किया गया।
कैंप के दौरान एक बालक में हृदय रोग की पुष्टि हुई, जिसे ‘चिरायु योजना’ के तहत उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी। सभी मरीजों को मौके पर उपचार और निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुरूप साहू और डॉ. बी.एस. साहू ने बताया कि अब दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हो रही हैं, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आने की उम्मीद है। ग्रामीण अब भय से नहीं, बल्कि विश्वास और उम्मीद से भरे दिख रहे हैं।
बीजापुर कलेक्टर श्री संबित मिश्रा ने स्वास्थ्य विभाग की टीम की सराहना करते हुए कहा, “शासन के निर्देशानुसार प्रशासन अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। ‘नियद नेल्लानार योजना’ के तहत अंदरूनी क्षेत्रों में विकास कार्यों में तेजी आई है।”
बीजापुर में यह पहल इस बात का प्रतीक बन गई है कि अब यह इलाका माओवाद नहीं, बल्कि मुख्यधारा और विकास की नई पहचान बनने की राह पर है।






