बीजाडांड़ धरना स्थल पर डॉ. मोती रावेन कंगाली की जयंती मनाई गई; कोल ब्लॉक के खिलाफ आंदोलन तेज

सुशील जायसवाल

 

कोरबा (पसान): छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पसान तहसील अंतर्गत ग्राम बीजाडांड़ में पिछले 20 दिनों से चल रहा अनिश्चितकालीन धरना अब और मुखर होने लगा है। रूंगटा कोल ब्लॉक आवंटन को निरस्त करने की मांग कर रहे ग्रामीणों ने गोंडवाना इतिहासकार, गोंडवाना रत्न पेनवासी डॉ. मोती रावेन कंगाली की जयंती के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया।

बुढ़ादेव पेनठाना की स्थापना और महापूजन

आंदोलन स्थल पर ‘बुढ़ादेव पेनठाना स्थापना महागोंगो’ (महापूजन) का आयोजन किया गया। प्रकृति शक्ति की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद बुढ़ादेव की स्थापना की गई। इस दौरान उपस्थित आंदोलनकारियों और समाजसेवियों ने डॉ. कंगाली को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके द्वारा बताए गए ‘जल, जंगल और जमीन’ के संरक्षण के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

वक्ताओं का संदेश: संवैधानिक अधिकारों की रक्षा

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि डॉ. मोती रावेन कंगाली का साहित्य और ऐतिहासिक शोध आने वाली पीढ़ियों के लिए एक धरोहर है। उन्होंने समाज को जागरूक करते हुए कहा:

डॉ. कंगाली का जीवन संघर्ष और स्वाभिमान का प्रतीक है।

हसदेव और तिरिया जंगल जैसे प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना आदिवासियों का संवैधानिक अधिकार है।

क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा को बचाने के लिए यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक कोल ब्लॉक आवंटन निरस्त नहीं हो जाता।

प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा आक्रोश

उल्लेखनीय है कि बीजाडांड़ के साथ-साथ ग्राम सासिन और सुखाबहरा में भी अनिश्चितकालीन धरना जारी है। तिरिया जंगल बचाने के समर्थन में अब आसपास के कई गांवों के लोग एकजुट हो रहे हैं। 20 दिन बीत जाने के बाद भी शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल न किए जाने के कारण ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है।

आंदोलनकारियों की चेतावनी: ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र ही जनहित में निर्णय लेते हुए कोल ब्लॉक को निरस्त नहीं किया, तो इस आंदोलन को और भी उग्र और व्यापक रूप दिया जाएगा।