
✍️ भागीरथी यादव
एमसीबी (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर): जिले के शहरी इलाकों में इन दिनों नशे के सामानों की कालाबाजारी अपने चरम पर है। मनेन्द्रगढ़ और चिरमिरी जैसे प्रमुख शहरों में सिगरेट और गुटखा निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से कहीं अधिक कीमतों पर बेचा जा रहा है। आलम यह है कि मनमाने दाम वसूलने के बावजूद जिम्मेदार विभाग मौन साधे हुए हैं।
आम आदमी की जेब पर डाका
बाजार से मिल रही शिकायतों के अनुसार, उपभोक्ताओं को हर पैकेट पर भारी अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ रही है:
सिगरेट: ₹65 वाला पैकेट अब ₹80 में बिक रहा है। कुछ प्रीमियम ब्रांड्स पर तो ₹20 तक की अतिरिक्त वसूली हो रही है।
गुटखा: ₹10 के पाउच के लिए ग्राहकों से ₹15 से ₹20 तक वसूले जा रहे हैं।
थोक व्यापारियों का ‘GST’ बहाना
इस कालाबाजारी के पीछे छोटे दुकानदारों का अपना तर्क है। उनका आरोप है कि बड़े थोक व्यापारी और एजेंसी संचालक “GST में 40% की वृद्धि” का झूठा हवाला देकर उन्हें महंगा माल बेच रहे हैं। छोटे दुकानदारों का कहना है कि यदि वे बढ़े हुए दाम का विरोध करते हैं, तो उनकी सप्लाई काट दी जाती है।
“माल पीछे से महंगा आ रहा है” – यह वह रटा-रटाया जुमला है जिसे बोलकर खुदरा विक्रेता ग्राहकों की जेब ढीली कर रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
उपभोक्ता अधिकारों के इस खुले उल्लंघन पर स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि:
खाद्य विभाग और प्रशासन की निष्क्रियता ने मुनाफाखोरों के हौसले बुलंद कर दिए हैं।
नियमित निरीक्षण और छापेमारी न होने से यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।
डर यह है कि यदि इस पर लगाम नहीं लगी, तो अन्य आवश्यक वस्तुओं के दामों में भी इसी तरह की मनमानी शुरू हो जाएगी।
जनता की मांग: कड़ी कार्रवाई हो
स्थानीय नागरिकों ने जिला कलेक्टर से गुहार लगाई है कि थोक एजेंसियों के स्टॉक, बिल और टैक्स भुगतान की सघन जांच की जाए। जनता ने मांग की है कि:
बाजार में विशेष अभियान चलाकर ओवररेटिंग रोकी जाए।
दोषी पाए जाने वाले दुकानदारों और एजेंसियों के लाइसेंस रद्द किए जाएं।
MRP से अधिक वसूली पर भारी जुर्माना लगाया जाए।
जब तक प्रशासन सख्ती नहीं दिखाएगा, चिरमिरी और मनेन्द्रगढ़ के गलियारों में यह खुली लूट जारी रहने की आशंका है।






